अबीर-गुलाल की जगह फूलों की पंखुडिय़ों से एक दूसरे का स्वागत
हवन-यज्ञ के साथ गोलमुरी में आठ दिवसीय श्री भागवत कथा का समापन, भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद
जमशेदपुर : गोलमुरी मनिंदर टावर में चल रहे आठ दिवसीय भागवत कथा का हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ गुरूवार को कथा का विश्राम हो गया. शाम को वृंदावन की परंपरा अनुसार फूलों की होली खेली गई, जहां अबीर-गुलाल की जगह गेंदे, गुलाब और चमेली की पंखुडिय़ों से एक-दूसरे का स्वागत किया गया. वृंदावन से आये आचार्य सुरेश चन्द्र शास़्त्री की टीम ने शानदार भजनों की प्रस्तुति दी. राधा-कृष्ण की भक्ति के गीतों के बीच लोग फूलों की वर्षा की. बरसाना के लठमार होली भी खेली गयी.
आचार्य ने कहा कि फूलों की होली राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति का प्रतीक है. हवन एवं पुर्णाहुति सहित फूलों की होली के बाद शाम को भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया. इसका आयोजन गोलमुरी के चम्पा-रतन अग्रवाल (गोयल परिवार) द्धारा अपनी शादी की 25वीं सालगिरह पर किया गया, जिसे सफल बनाने में पार्वती देवी, रतन अग्रवाल, चम्पा अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, माधव अग्रवाल आदि का योगदान रहा.
इससे पहले शास़्त्री जी महाराज ने भद्गगवत कथा के सार का संक्षेेप में वर्णन किया. बताया कि भागवत कथा का श्रवण से मन आत्मा को परम सुख की प्राप्ति होती है. भागवत में बताए उपदेशों उच्च आदर्शों को जीवन में ढालने से मानव जीवन जीने का उद्देश्य सफल हो जाता है. श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु आत्मा को जागृत करने का माध्यम है. यह कथा जीवन को दिशा देती है, धर्म को दृढ़ करती है और आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है.
