भगवान के नाम जाप से पापी भी हो जाते हैं पाप मुक्त
सोनारी गीता भवन से निकली भव्य कलश यात्रा, पूजन के बाद श्रीराम कथा का शुभारंभ
जमशेदपुर : भगवान का साकार या निराकार रूप का जो प्राणी वंदन करता है, भगवान कहते हैं कि उससे ज्यादा महत्व मेरे नाम जाप में हैं जिसे जपने से बड़े से बड़ा पापी भी पाप मुक्त हो जाता है. सोनारी स्थित गीता भवन में रविवार से नौ दिवसीय श्रीराम कथा विश्व शांति ज्ञान यज्ञ शुरू हुआ. पहले दिन भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए जमुना किनारेवाले (हरियाणा) से आए आचार्य रविकांत वत्स ने ये बातें कही.
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा उन्हें भी मधुर लगती है जो उनका प्रेमी होता है. रामचरित मानस की रचना भगवान शिव ने की थी और उन्होंने सबसे पहले सती के बाद संतो को सुनाया. इसके बाद भगवान ने काग भूशुंण्डी को सुनाया और उनके मुख से याग वल्क ने और फिर भारद्वाज ने सुना. इसके बाद भगवान शिव ने वाल्मिकी को रामायण की रचना करने के लिए प्रेरित किया. वाल्मिकी ने संस्कृति में रामायण लिखी जिसका चैत्र मास की नवमी को मंगलवार के दिन 1631 में तमसा नदी के किनारे तुलसीदास जी ने अवधि भाषा में इसकी रचना करते हुए श्रृष्टि के सम्मुख प्रस्तुत किया था.
गीता आश्रम से निकली भव्य कलश यात्रा
इससे पहले सुबह दोमुहानी कैलाशनगर स्थित गीता भवन भगवान गणेश की वंदना व पंचांग पूजा हुई. पं. साकेत पांडेय सहित बनारस के अस्सी घाटों से आए पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण से भगवान का पूजन किया. इसके बाद भव्य कलश यात्रा निकली. ढोल-नगाड़ों व भगवान राम परिवार की झांकी के साथ 108 महिलाएं सिर पर कलश लेकर दोमुहानी संगम पहुंची और जल लेकर सोनारी की मुख्य सडक़ों का भ्रमण करते हुए राम मंदिर पहुंचे. यहां भगवान का दर्शन करने के बाद वापस आश्रम पहुंचे. जहां सभी भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया.

