भगवान विष्णु के अंश में हुआ था भगवान राम का अवतरण
सोनारी कैलाशनगर गीता भवन में नौ दिवसीय श्रीरामकथा का दूसरा दिन
जमशेदपुर : धरती पर जब-जब धर्म की हानि होती है, ब्राह्मणों-संतो का तिरस्कार होता है, तब-तब अधर्म का नाश करने के लिए भगवान धरती पर अवतरित होते हैं. उक्त बातें आचार्य रविकांत वत्स ने सोनारी कैलाशनगर के गीता भवन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन व्यासपीठ से कही. उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के अंश में भगवान राम का भी अवतरण इसी उद्देश्य से हुआ था. कथा में आचार्य रविकांत ने बताया कि भगवान शिव ने सती को भगवान राम के अवतरण के उद्देश्य की कथा बताई. इससे पहले सुबह में गीता आश्रम में रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ. बनारस के अस्सी घाट से आए पुरोहितों ने पं. साकेत पांडेय के नेतृत्व में मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना की.
इसी प्रसंग में उन्होंने बताया कि राक्षस ताडक़ासुर ने भगवान शिव की तपस्या कर उनसे वर मांगा कि उनकी मृत्यु केवल उनके या उनके अंश के द्वारा ही हो. वर देने के बाद भगवान शिव जब तपस्या में लीन हो गए तो ताडक़ासुर का आतंक पूरे ब्रह्मांड में बढ़ गया. इंद्र का सिहासन भी जब डोलने लगा तो उन्होंने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए रति और कामदेव को इसकी जिम्मेदारी दी. जब दोनों के प्रयास से भी भगवान शिव की तपस्या भंग नहीं हुई तो उन्हें काम अस्त्र चलाया जिससे भगवान क्रोधित हो गए और उनकी तीसरी आंख खुल गई जिससे कामदेव भस्म हो गए. इस पर रति ने क्षमा याचना की और ताडक़ासुर का पूरा वृतांत बताया. इस पर भगवान ने वर दिया कि कामदेव का अगला जन्म यदुवंश में प्रद्युमन के रूप में होगा.

