Dhanbad Education News : धनबाद के स्कूलों में स्वास्थ्य व सुरक्षा की अलख जगाने की नई पहल, 55 विद्यालयों के 110 शिक्षकों को मिला ‘आरोग्य दूत’ सम्मान
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Dhanbad : कोयलांचल की शैक्षणिक व्यवस्था में स्वास्थ्य और जागरूकता का नया अध्याय जुड़ गया है। धनबाद के मिश्रित भवन में शनिवार को ‘स्वास्थ्य और कल्याण कार्यक्रम’ के तहत जिले के बेहतरीन कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों के 55 विद्यालयों से चयनित 110 शिक्षकों को ‘आरोग्य दूत’ के रूप में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
बच्चों को स्वस्थ व सुरक्षित बनाने का बड़ा अभियान
सम्मानित होने वाले ये सभी शिक्षक स्कूलों में ‘आरोग्य दूत’ की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनका मुख्य कार्य विद्यार्थियों के बीच न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि साइबर सुरक्षा और सड़क सुरक्षा जैसे समसामयिक और संवेदनशील विषयों पर जागरूकता फैलाना है। इस विशेष अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सी-3 एनजीओ (C-3 NGO) की टीम सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है।
NCERT के विशेष मॉड्यूल से मिलेगी शिक्षा
शिक्षकों के माध्यम से बच्चों तक जानकारी पहुँचाने के लिए NCERT ने एक विशेष और सरल मॉड्यूल तैयार किया है। इस पहल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- लक्षित समूह : कक्षा 06 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
- साप्ताहिक सत्र : स्कूलों में हर सप्ताह विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहाँ बच्चों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षित किया जाता है।
- व्यावहारिक शिक्षा : बच्चों को रटने के बजाय सरल और प्रभावी तरीके से स्वस्थ आदतों और सुरक्षा नियमों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारी हुए शामिल
कार्यक्रम के दौरान जिले के आला अधिकारियों ने शिक्षकों का उत्साहवर्धन किया। सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अभिषेक झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और आरोग्य दूत के रूप में उनकी यह नई भूमिका बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखेगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग और सी-3 टीम के कई सदस्य उपस्थित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से छात्र न केवल शारीरिक रूप से फिट रहेंगे, बल्कि आज के डिजिटल युग में साइबर खतरों और सड़क दुर्घटनाओं के प्रति भी सजग बन सकेंगे। धनबाद की यह पहल झारखंड के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा के रूप में देखी जा रही है।

