गुरु वशिष्ठ के आश्रम में श्रीराम ने प्राप्त की सभी तरह की विद्या
सोनारी गीता भवन में चल रहे श्रीरामकथा ज्ञान यज्ञ का चतुर्थ दिन
जमशेदपुर : सोनारी कैलाशनगर स्थित गीता भवन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन बुधवार को आचार्य रविकांत वत्स (हरियाणा) ने भगवान राम के जन्म की महिमा का बखान किया. उन्होंने कहा कि दशरथ बड़े व्याकुल थे कि आयु का चौथापन आ गया लेकिन संतान का सुख नहीं मिला. ऐसे में पूर्व जन्म में मनु और सतरूपा को दिए गए वरदान का मान रखते हुए भगवान विष्णु अपने चार अंश में उनके यहां जन्म लिया. उन्होंने बताया कि भगवान दशरथ ने जब अपनी चिंता कुल गुरु वशिष्ठ को सुनायी तो उन्होंने एक यज्ञ करायी. इस यज्ञ के फल के रूप में अग्नि देव खीर के साथ प्रकट हुए. राजा दशरथ ने इस खीर का आधा भाग अपनी धर्मपत्नी कौशल्या को दिया जिससे भगवान राम का जन्म हुआ. तीसरा भाग पत्नी कैकयी को दिया जिससे भरत और चौथा भाग सौमित्रा को दिया जिससे लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ. इस तरह भगवान विष्णु अपने चार अंश के साथ धरती पर अवतरित हुए.
उन्होंने बताया कि भगवान राम की बाल लीला ऐसी है कि उनका दर्शन करने स्वर्गलोक से देवता पर धरती पर आए. बाल्यावस्था पूर्ण करने के बाद भगवान राम अपने सभी भाइयों के साथ गुरु वशिष्ठ के आश्रम गए जहां उन्होंने सभी तरह की विद्या प्राप्त की. फिर वापस आने पर महषि विश्वामित्र आए और अपने यज्ञ को पूर्ण करने के लिए भगवान राम-लक्ष्मण को साथ ले गए. वहां उन्होंने राक्षसों का संहार किया. अपराह्न साढ़े तीन बजे से शुरू हुई कथा शाम साढ़े छह बजे तक चली. इसके बाद बनारस से आए प. साकेत पांडेय के नेतृत्व में सभी पुरोहितों ने भगवान राम की आरती की और भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया. इस मौके पर स्थानीय बच्चे भगवान राम व माता सीता का प्रतिरूप बनकर आए.
