March 24, 2026

Jamshedpur Civil Court big decision : जुगसलाई में 16 साल से किराया डकारने वाले किराएदार को दुकान खाली करने का आदेश, मकान मालिक की हुई जीत

Jamshedpur Civil Court big decision

जुगसलाई में 16 साल से किराया डकारने वाले किराएदार को दुकान खाली करने का आदेश, मकान मालिक की हुई जीत

Jamshedpur/Jharkhand : लौहनगरी के जुगसलाई क्षेत्र में संपत्ति विवाद के एक पुराने मामले में न्याय की जीत हुई है। जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के सिविल जज सीनियर डिवीजन विशाल गौरव की अदालत ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मकान मालिक के पक्ष में आदेश जारी किया है। अदालत ने पिछले 16 वर्षों से दुकान का किराया न देने और संपत्ति पर अवैध दावा ठोकने वाले किराएदार को तत्काल दुकान खाली करने का निर्देश दिया है।

किराएदार ने खुद को बताया था मालिक

यह पूरा विवाद जुगसलाई के चौक बाजार स्थित महावीर सिंह मार्केट की एक दुकान से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, मकान मालिक सत्येंद्र सिंह ने यह दुकान माधव प्रसाद भारतीय को किराए पर दी थी। हालांकि, किराएदार माधव प्रसाद भारतीय ने वर्ष 2011 से सत्येंद्र सिंह को किराया देना बंद कर दिया था। विवाद तब और गहरा गया जब किराएदार न केवल किराया देने से मुकर गया, बल्कि उस दुकान पर अपना मालिकाना हक भी जताने लगा।hemkund-public-school

लंबी चल कानूनी लड़ाई

अपने हक के लिए सत्येंद्र सिंह ने वर्ष 2012 में जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। वर्तमान में यह मामला केस नंबर O.S NO.370/24 के तहत विचाराधीन था। पिछले 12 वर्षों से चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद, सिविल जज विशाल गौरव की अदालत ने पाया कि प्रतिवादी का दावा निराधार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व सत्येंद्र सिंह के पास है और किराएदार को दुकान खाली करनी होगी।

इन अधिवक्ताओं ने रखी मकान मालिक की दलील

इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में वादी सत्येंद्र सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज कुमार सिन्हा और उर्वशी सिंह ने पैरवी की। अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पुख्ता दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे यह साबित हुआ कि प्रतिवादी ने वर्षों से रेंटल एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है। 16 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से मकान मालिक ने राहत की सांस ली है। यह आदेश उन मकान मालिकों के लिए एक नजीर माना जा रहा है जो लंबे समय से किराएदारों के साथ संपत्ति विवाद झेल रहे हैं।

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