Ranchi MP-MLA Court Verdict : पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत 7 आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी, जानलेवा हमले का था केस
Civil Court Ranchi
Ranchi/Jharkhand : झारखंड के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के लिए बुधवार का दिन राहत भरा रहा। रांची स्थित एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने जानलेवा हमले और मारपीट से जुड़े एक पुराने मामले में बंधु तिर्की सहित कुल सात आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करने के बाद अपना यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
सुरक्षित रखा गया फैसला, बुधवार को सुनाया गया
गौरतलब है कि इस मामले में अदालत ने बीते 18 मार्च को ही दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में बंधु तिर्की के साथ उनके तीन पूर्व अंगरक्षक—रामदेव प्रसाद, विशाल उरांव और सीनू राम जोंको—के अलावा अमोद कुमार सिंह, मोहन सिंह और दिलीप कुमार भी ट्रायल का सामना कर रहे थे। अदालत के इस फैसले के बाद सभी सात आरोपित अब इस कानूनी शिकंजे से मुक्त हो गए हैं।
क्या था मामला और आरोप?
यह कानूनी विवाद करीब 9 साल पुराना है। घटना 1 नवंबर 2017 की है, जब भारत स्काउट एंड गाइड्स, झारखंड के राज्य काउंसिल चुनाव में कथित गड़बड़ी को लेकर एक जांच चल रही थी। शिकायतकर्ता नरेश कुमार ने आरोप लगाया था कि जब वे बैठक में शामिल होने जा रहे थे, तब उन्हें रोका गया और उनके साथ मारपीट की गई।
कोतवाली थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसमें लोहे की रॉड से मारपीट और गाली-गलौज करने, अंगरक्षकों द्वारा कॉलर पकड़कर व कट्टा दिखाकर जान से मारने की धमकी देने तथा सोने की चेन छीनने का भी आरोप लगाया था।
ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका अभियोजन पक्ष
लंबी चली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और आधारहीन बताया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसे कोई भी ठोस प्रमाण पेश करने में विफल रहा जो इन गंभीर आरोपों की पुष्टि कर सके। साक्ष्यों की कमी को देखते हुए विशेष अदालत ने न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए बंधु तिर्की और अन्य सभी सहयोगियों को बाइज्जत बरी कर दिया। इस फैसले के बाद बंधु तिर्की के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

