बोकारो से लापता युवती मामले में हाईकोर्ट सख्त, 23 मार्च को एसपी सशरीर तलब
बोकारो से लापता युवती मामले में हाईकोर्ट सख्त, 23 मार्च को एसपी सशरीर तलब
Ranchi/Jharkhand : झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती के पिछले सात महीनों से लापता होने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने बोकारो के पुलिस अधीक्षक (SP) को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें 23 मार्च 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि जांच की प्रगति संतोषजनक नहीं रही, तो इस गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी सीबीआई (CBI) को सौंपी जा सकती है।
एफआईआर में 10 दिन की देरी पर जवाब तलब
वर्चुअल सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सनहा (Missing Diary) दर्ज होने के बाद भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में 10 दिनों का विलंब क्यों हुआ? कोर्ट ने एसपी से यह भी पूछा कि इस गंभीर लापरवाही के लिए संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ अब तक क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। अदालत ने एसपी को केस डायरी और अनुसंधान की अद्यतन रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने को कहा है।
पुणे से जुड़ा है मामला, पुलिस की गिरफ्त से भागा था संदिग्ध
यह मामला पिंडराजोड़ा थाना से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, युवती 31 जुलाई 2025 से लापता है। परिजनों को 11 दिसंबर 2025 को एक कॉल आया था, जिसमें युवती के पुणे में होने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने कॉल करने वाले युवक को पकड़ा भी था, जिसने स्वीकार किया था कि युवती पुणे में उसके दोस्त के पास है।
हैरानी की बात यह है कि जब पुलिस टीम उस युवक को लेकर पुणे जा रही थी, तब वह आरोपी पुलिस को चकमा देकर ट्रेन से फरार हो गया। इस घटना के बाद से पुलिस के पास युवती का कोई सुराग नहीं है, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नार्को टेस्ट की तैयारी, लेकिन कोर्ट असंतुष्ट
बोकारो एसपी ने शपथ पत्र के माध्यम से बताया कि पुलिस ने बोकारो और आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी की है। एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है और उसका नार्को टेस्ट कराने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सात माह बीत जाने के बाद भी युवती का सुराग नहीं लग पाया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने अपनी दलीलें पेश कीं।
युवती की मां ने लगाई है गुहार
मामले की गंभीरता को देखते हुए लापता युवती की मां ने उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है। मां का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही के कारण ही उनकी बेटी अब तक उनसे दूर है। अब सबकी नजरें 23 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ पुलिस को अपनी साख बचाने के लिए पुख्ता जवाब देना होगा।
