March 16, 2026

Jharkhand IAS Officers Property Disclosure : झारखंड कैडर के 155 IAS अधिकारियों ने सार्वजनिक की संपत्ति, कई राज्यों में जमीन-मकान

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  • केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड हुआ वार्षिक संपत्ति विवरण

Ranchi/Jharkhand : झारखंड कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 155 अधिकारियों ने अपनी चल और अचल संपत्तियों का वार्षिक विवरण सार्वजनिक कर दिया है। यह जानकारी केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की गई है।

आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी उनके पास जमीन, मकान और फ्लैट जैसी संपत्तियां मौजूद हैं। यह वार्षिक संपत्ति विवरण प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक किया जाता है, ताकि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की संपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार के पास कई शहरों में संपत्ति

झारखंड के मुख्य सचिव और 1993 बैच के आईएएस अधिकारी अविनाश कुमार द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार उनके पास पैतृक और अर्जित दोनों प्रकार की संपत्तियां हैं। विवरण के मुताबिक सीतामढ़ी जिले के सुरसंड में लगभग 1.18 एकड़ और 20 एकड़ कृषि भूमि दर्ज है। मुजफ्फरपुर के गन्नीपुर क्षेत्र में हाउसिंग जमीन का स्वामित्व भी बताया गया है। पटना के प्रतिष्ठित बोरिंग रोड इलाके में एक फ्लैट दर्ज है।

इसके अलावा पाटलिपुत्र कॉलोनी और दानापुर में भी उनके नाम से कीमती प्लॉट का विवरण दिया गया है। इन संपत्तियों का उल्लेख केंद्रीय पोर्टल पर जमा किए गए वार्षिक विवरण में किया गया है।

पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है संपत्ति का खुलासा

दरअसल, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को हर वर्ष अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर निगरानी रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।

इस बार झारखंड कैडर के कुल 155 अधिकारियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड किया है।

कई राज्यों में फैली संपत्ति

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कई अधिकारियों के पास झारखंड के अलावा बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के शहरों में भी संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें कृषि भूमि, आवासीय प्लॉट, फ्लैट और मकान शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति का यह विवरण प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ जनविश्वास को मजबूत करने में भी मददगार होता है।

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