Jharkhand Revenue Department Staff Shortage : झारखंड के अंचल कार्यालयों में कर्मचारियों की भारी कमी, राजस्व व्यवस्था बेपटरी, म्यूटेशन के लिए आम लोग भटकने को मजबूर
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Ranchi : झारखंड के अंचल और राजस्व कार्यालय वर्तमान में अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। राज्य के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले इन कार्यालयों में कर्मचारियों का भारी टोटा है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जमीन की रसीद कटवाने से लेकर दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों के लिए लोगों को हफ्तों और महीनों तक सरकारी दफ्तरों की चौखट लांघनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि अंचल कार्यालयों में फाइलों का अंबार लगा है, लेकिन उन्हें आगे बढ़ाने वाले हाथ नदारद हैं।
आश्वासन के भरोसे टिकी व्यवस्था और आम आदमी की पीड़ा
जब भी कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर अंचल कार्यालय पहुँचता है, तो उसे अधिकारियों की ओर से जल्द काम होने का आश्वासन तो मिलता है, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। अंचल निरीक्षक, राजस्व उप निरीक्षक, अमीन और लिपिक जैसे अहम पदों पर कर्मियों की कमी ने पूरी चयन प्रक्रिया को ठप कर दिया है। इसके चलते दाखिल-खारिज और म्यूटेशन के मामलों में महीनों की देरी हो रही है, जिससे न केवल जमीन संबंधी विवाद बढ़ रहे हैं, बल्कि प्रमाण पत्रों के लिए भी आम लोगों को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
रिक्त पदों के चौंकाने वाले आंकड़े
राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत अंचल कार्यालयों में रिक्तियों की स्थिति भयावह है। स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है, जिसका विवरण इस प्रकार है:
- अंचल निरीक्षक : कुल स्वीकृत पद 372 हैं, जिनमें से केवल 253 कार्यरत हैं और 119 पद रिक्त पड़े हैं।
- राजस्व उप निरीक्षक : 2144 स्वीकृत पदों के मुकाबले मात्र 1163 कर्मी कार्यरत हैं, जबकि 981 पद खाली हैं।
- अमीन : सबसे खराब स्थिति अमीन के पदों की है, जहाँ 280 स्वीकृत पदों में से केवल 89 कार्यरत हैं और 191 पद रिक्त हैं।
- लिपिक : 2269 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1982 कार्यरत हैं और 287 पदों पर नियुक्तियां शेष हैं।
व्यवस्था में सुधार की दरकार और बढ़ते भूमि विवाद
अंचल कार्यालयों में कर्मचारियों की इस भारी किल्लत का असर राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। जमीन संबंधी मामलों का समय पर निपटारा न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रसीद और म्यूटेशन की प्रक्रिया लंबित होने से लोग अपनी ही जमीन की खरीद-बिक्री या बैंक लोन जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक इन रिक्त पदों पर जल्द बहाली नहीं की जाती, तब तक राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार आना नामुमकिन है। प्रशासन को इस दिशा में युद्ध स्तर पर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।

