February 11, 2026

‘जिवेदोक अभियान’ की समीक्षा में 17 प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर चर्चा

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● डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन पर बल, डीडीडी बोले- धरातल पर कार्य होने के साथ-साथ डॉक्यूमेंटेशन भी उचित तरीके से करें

जमशेदपुर : जिले में संचालित ‘जिवेदोक’ अभियान के तहत विभिन्न प्रखंडों में सामुदायिक स्तर पर स्थापित किए जा रहे उद्यमों की समीक्षा हेतु समाहरणालय सभागार में बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने की. बैठक में जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्थापित एवं प्रस्तावित उद्यम इकाइयों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा संबंधित पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए. अभियान का उद्देश्य सभी प्रखंडों में उपलब्ध सामुदायिक संसाधनों को ध्यान में रखते ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा लाभार्थियों को उद्यमी के रूप में सशक्त बनाना है.
बैठक के दौरान जिले में संचालित कुल 17 उद्यमों की प्रगति पर विमर्श किया गया. इनमें प्रमुख रूप से बोड़ाम में मधु प्रसंस्करण इकाई, मुसाबनी में डोकरा आर्ट एवं सिल्क परियोजना, घाटशिला के चेंगजोड़ा में हेरिटेज ग्राम, बोड़ाम के अंधारझोर में वाद्य यंत्र निर्माण, गुड़ाबांदा में बकरी पालन, बहरागोड़ा के मानुषमुड़िया में बंबू ट्रिटमेंट प्लांट, जुगिशोल में क्लस्टर एवं काजू प्रोसेसिंग यूनिट, गोलमुरी सह जुगसलाई में मशरूम उत्पादन, धालभूमगढ़ में पैटकर पेंटिंग, घाटशिला में वुड कार्विंग परियोजना, डुमरिया के लखाईडीह में सरसों तेल प्रसंस्करण इकाई, पोटका एवं पटमदा में पोल्ट्री को-ऑपरेटिव, डुमरिया में माइक्रो इकोनॉमिक जोन, तथा सीएम स्मार्ट ग्राम योजना के अंतर्गत संचालित उद्यम शामिल है.
बैठक में चेंगजोड़ा के हेरिटेज विलेज प्रोजेक्ट के उचित संचालन पर चर्चा हुई. उप विकास आयुक्त ने कहा कि चूंकि इस प्रोजेक्ट से राजस्व संग्रहण जुड़ा है, ऐसे में इसका संचालन भी सरकार के गाइडलाइन के अनुसार होनी चाहिए. जीएम डीआईसी को प्रोजेक्ट के बेहतर संचालन हेतु तकनीकी रूप से समर्थ प्रस्ताव समर्पित करने का निर्देश दिया गया. मानुषमुड़िया के बंबू ट्रिटमेंट प्लांट स्थल का जांच कर प्रोजेक्ट क्रियान्वित किया जा सकता है या नहीं इसकी भी रिपोर्टिंग का निर्देश जीएम डीआईसी को दिया गया. उप विकास आयुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी उद्यमों की गुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन एवं स्थायित्व पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा लाभार्थियों को तकनीकी एवं विपणन से जुड़ा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि जिवेदोक अभियान के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके.