February 11, 2026

जंतरी से नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ते हैं प्रीतपाल

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जमशेदपुर : सोनारी के प्रीतपाल सिंह पनेसर शहर के सिख समाज और सोनारी के लोगों के लिए परिचय का मोहताज नहीं है. बतौर पहचान सामाजिक कार्यकर्ता की है. वे जंतरी (पंचांग) के माध्यम से पंजाबी सिख एवं हिंदू बिरादरी को विरासत से जोड़े हुए हैं. प्रत्येक वर्ष दिसंबर-जनवरी माह में सिख एवं पंजाबी हिंदू परिवार के बीच निःशुल्क जंतरी का वितरण करते हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी परंपरा, प्रथा, विरासत से खुद को जोड़ने में गर्व महसूस करे.
सिखों का नया साल चैत्र महीने ( 14 या 15 मार्च) को शुरू होता है. वर्तमान में साल की गणना जनवरी से लेकर दिसंबर तक होने का प्रचलन है. इसे ध्यान में रखकर प्रकाशकों द्वारा पंचांग मुद्रित किया जाता है, जिसका पंजाबी रूपांतरण खालसा हीरा जंतरी और हिंदी रूपांतरण जगजीत जंतरी के शीर्षक से विख्यात है. वैसे रूढ़िवादी सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार चलते हैं जो चैत्र से लेकर फागुन माह का होता है.
नानकशाही कैलेंडर में मिथ कथा से जुड़ी तथा पंचक जैसी भ्रान्ति तिथियां का जिक्र नहीं होता है, जबकि खालसा हीरा जंतरी और जगजीत जंतरी में वैदिक कर्म कांड से जुड़े हर महत्वपूर्ण तथ्य रहते हैं. प्रीतपाल सिंह पनेसर के अनुसार संयुक्त बिहार तथा झारखंड में हिंदू बनारस मैथिली पंचांग आसानी से उपलब्ध रहते हैं लेकिन पंजाबियों के लिए दिन त्यौहार को मनाना थोड़ा मुश्किल होता था. यहां बताना उचित होगा कि प्रीतपाल सिंह जमशेदपुर के पूर्व सांसद स्वर्गीय स्वर्ण सिंह के सगे भगीना है. उन्हें आदर्श माना और प्रेरणास्वरूप समाज सेवा में लग गए तो लगे रह गए.