Lok Sabha Expansion Proposal : संसद व विधानसभाओं में दिखेगी नारी शक्ति, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर होगी 816, महिलाओं के लिए 273 सीटें, जानें-झारखंड विधानसभा में कितनी सीटें होंगी
संसद व विधानसभाओं में दिखेगी नारी शक्ति, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर होगी 816, महिलाओं के लिए 273 सीटें, जानें-झारखंड विधानसभा में कितनी सीटें होंगी
Political Desk : केंद्र सरकार देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान संसदीय सत्र में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जा सकते हैं, जिनमें एक बड़ा संवैधानिक संशोधन भी शामिल है। इस प्रस्तावित बदलाव के तहत लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन बढ़ी हुई सीटों में से लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। वहीं बात करें झारखंड विधानसभा की तो यहां सीटों की संख्या 81 से बढ़ कर 108 हो सकती हैं।
क्या है 50+33 का नया जादुई फॉर्मूला?
- सरकार ने महिलाओं के आरक्षण को मौजूदा सांसदों की सीटों को प्रभावित किए बिना लागू करने के लिए एक विशेष ’50+33′ फॉर्मूला तैयार किया है।
- सीटों में वृद्धि : लोकसभा की मौजूदा सीटों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर उन्हें 816 तक ले जाया जाएगा।
- महिला प्रतिनिधित्व : कुल 816 सीटों में से एक-तिहाई (33 प्रतिशत), यानी लगभग 273 सीटें केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।
- संतुलन : अतिरिक्त 273 सीटें मुख्य रूप से महिलाओं के लिए जोड़ी जाएंगी, ताकि वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों की सीटों पर कोई बड़ा संकट न आए।
- बहुमत का गणित : इस बदलाव के बाद संसद में बहुमत हासिल करने के लिए जादुई आंकड़ा 272 से बढ़कर 409 हो जाएगा। यह व्यवस्था केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में लागू की जाएगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस प्रस्ताव पर व्यापक सहमति बनाने के लिए कांग्रेस, एनसीपी (शरद गुट) और एआईएमआईएम जैसे प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं के साथ चर्चा की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जनगणना का इंतजार खत्म, 2011 के डेटा पर ही होगा परिसीमन
सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संवैधानिक संशोधन) में शर्त थी कि आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। इसी कारण यह 2024 के चुनावों में प्रभावी नहीं हो सका। हालांकि, अब सरकार नए संशोधन के जरिए जनगणना के लंबे इंतजार को समाप्त करना चाहती है। नई योजना के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को धरातल पर उतारा जा सके। आरक्षित सीटों का चयन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लॉटरी पद्धति से किया जाएगा।
राजनीतिक समीकरणों पर संभावित प्रभाव
- यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो 2029 के चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे बड़े चुनाव होंगे।
- महिला सांसदों की संख्या : वर्तमान में महिला सांसदों की संख्या करीब 78 है, जो बढ़कर 273 तक पहुंच सकती है।
- राज्यों की स्थिति : उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सीटों की संख्या संभावित रूप से 120 और बिहार में 60 तक जा सकती है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
- संवैधानिक ढांचा : यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा और प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देगा, बल्कि नीति निर्धारण में महिलाओं की सक्रिय भूमिका को भी सुनिश्चित करेगा।
प्रस्तावित बदलाव एक नजर में
- वर्तमान सीटें : 543 -> प्रस्तावित सीटें: 816
- महिला आरक्षण : 273 सीटें (कुल का 33%)
- आधार : 2011 की जनगणना
- लक्ष्य : 2029 का आम चुनाव
- प्रभाव : लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाएं
