मौसम व जलवायु से संबंधित अध्ययन वर्तमान समय की ज़रूरत
● करीम सिटी कॉलेज में “खगोलीय एवं मौसम विज्ञान अवलोकन” पर कार्यशाला
जमशेदपुर : करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर के भूगोल विभाग द्वारा “खगोलीय एवं मौसम विज्ञान अवलोकन” पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह कार्यशाला विद्यार्थियों में मौसम विज्ञान, खगोलीय घटनाओं तथा वैज्ञानिक प्रेक्षण की समझ को विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप कोल्हान विश्वविद्यालय के ओएसडी प्रभात कुमार सिंह, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज़, कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. खुर्शीद अहसन, अंग्रेज़ी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मुस्तजाब अली खान, वाणिज्य विभाग के डॉ. अमीरुद्दीन उपस्थित थे. साथ ही कॉलेज के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आले अली, सहायक शिक्षिका डॉ. फ़रज़ाना अंजुम एवं डॉ. इनायत बानो भी उपस्थित रही. डॉ आले अली ने अतिथियों का स्वागत कर इस तीन दिवसीय
कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की.
मुख्य अतिथि ने कहा कि मौसम एवं जलवायु से संबंधित अध्ययन वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अवलोकन, आधुनिक तकनीक और निरंतर अनुसंधान के माध्यम से ही मौसम संबंधी चुनौतियों का समाधान संभव है. उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने तथा क्षेत्रीय अध्ययन और प्रायोगिक ज्ञान पर विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी. कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं शिक्षकों ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया और भूगोल विभाग की इस पहल की सराहना की. कार्यशाला का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत पावरपॉइंट प्रस्तुति रही. छात्रों ने अत्यंत स्पष्ट, क्रमबद्ध एवं तथ्यपरक ढंग से मौसम विज्ञान से संबंधित विभिन्न विषयों को प्रस्तुत किया. प्रस्तुति में विशेष रूप से भारत में मानसून की उत्पत्ति, उसकी विशेषताएँ तथा भारतीय कृषि एवं अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका को विस्तार से समझाया गया. इसके अतिरिक्त मौसम पूर्वानुमान की अवधारणा, उसकी उपयोगिता तथा दैनिक जीवन में उसके महत्व पर भी प्रकाश डाला गया.
प्रस्तुति के दौरान मौसम पूर्वानुमान के इतिहास पर चर्चा की गई, जिसमें यह बताया गया कि किस प्रकार प्राचीन काल में अनुभव और पारंपरिक संकेतों के आधार पर मौसम का अनुमान लगाया जाता था और समय के साथ यह प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप में विकसित हुई. इसके बाद मौसम पूर्वानुमान के विकास को समझाते हुए उपग्रह तकनीक, कंप्यूटर मॉडल तथा आधुनिक वैज्ञानिक विधियों की भूमिका को स्पष्ट किया गया. छात्रों ने मौसम पूर्वानुमान के विभिन्न उपकरणों जैसे थर्मामीटर, बैरोमीटर, एनीमोमीटर, वर्षामापी, मौसम रडार एवं उपग्रहों के कार्यों को सरल भाषा में समझाया. कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया.
