March 16, 2026

Jamshedpur Nano Cow Farming : जमशेदपुर में अनोखी पहल, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में होगा नैनो गायों का पालन

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  • गोसेवा को बढ़ावा देने के लिए मंदिर परिसर में विकसित होगा विशेष ‘गोसेवा क्षेत्र’

Jamshedpur/Jharkhand : शहर के केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में जल्द ही गोसेवा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है। मंदिर परिसर में विशेष गोसेवा क्षेत्र विकसित कर वहां मिनिएचर काउ (नैनो काउ) का पालन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को गौसेवा से जोड़ना और भारतीय परंपरागत गौसंस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस संबंध में विधायक सरयू राय ने बताया कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को गौसेवा की परंपरा से जोड़ने के लिए यह पहल की जा रही है, जिससे समाज में गौसंरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा।

आंध्र प्रदेश से लाई गईं दुर्लभ नस्ल की नैनो काउ

विधायक सरयू राय ने बताया कि मंदिर के आसपास रहने वाले एक व्यक्ति आंध्र प्रदेश से दो नैनो काउ मंगवाकर लाए थे। वे इन्हें प्रेमवश मंदिर में दिखाने के लिए लेकर पहुंचे। इन छोटे कद की गायों को देखकर मंदिर समिति और स्थानीय श्रद्धालु काफी उत्साहित हुए और फिर मंदिर परिसर में ही इनके पालन का निर्णय लिया गया। मंदिर समिति अब परिसर में एक विशेष गोसेवा क्षेत्र तैयार करने की योजना बना रही है, जहां इन नैनो काउ की उचित देखभाल और पालन-पोषण किया जाएगा।

आकार छोटा, देखभाल आसान

सरयू राय ने बताया कि नैनो काउ का आकार सामान्य गायों की तुलना में काफी छोटा होता है। इनकी ऊंचाई लगभग डेढ़ फुट तक होती है और ये औसतन करीब एक लीटर दूध प्रतिदिन देती हैं। छोटे आकार के कारण इनका पालन अपेक्षाकृत आसान होता है और इन्हें कम जगह में भी रखा जा सकता है। यही कारण है कि इन गायों को शहरी क्षेत्रों में भी आसानी से पाला जा सकता है।

देश के कुछ ही क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं यह विशेष नस्ल

जानकारी के अनुसार इस विशेष नस्ल की गायें देश के सीमित क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं। मुख्य रूप से पुंगनूर और वेचूर क्षेत्र में यह नस्ल प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में इन गायों के पालन से श्रद्धालुओं को दुर्लभ भारतीय नस्लों के संरक्षण के बारे में जानकारी मिलेगी और गौसेवा की परंपरा को भी बढ़ावा मिलेगा।

जल्द होगी गोसेवा क्षेत्र की स्थापना

मंदिर समिति ने बताया कि गोसेवा क्षेत्र के निर्माण और नैनो काउ के पालन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इस पहल से न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों को गौसेवा का अवसर मिलेगा, बल्कि यह क्षेत्र गौसंरक्षण और भारतीय संस्कृति के प्रचार का भी केंद्र बन सकता है।

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