राजनगर की तीन-तीन टुसु प्रतिमा ने जीता पुरस्कार
सोनारी दोमुहानी में टुसू मेला, जुटे सांसद विद्युत, विधायक सरयू व अन्य
जमशेदपुर : झारखंड सांस्कृतिक कला केन्द्र की ओर से आज सोनारी दोमुहानी तट पर भव्य टुसु मेला का आयोजन किया गया, जिसमें आकर्षक टुसू प्रतिमा व चौड़ल लेकर आनेवालों को नकद इनाम दिये गये. मौके पर अतिथियों ने टुसू पर्व के महत्व व विशेषताओं से लोगों को अवगत कराया. इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि सांसद विद्युत वरण महतो तथा अन्य अतिथियों में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन हिदायतुल्लाह खान, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजू गिरी, पूर्व सांसद सुमन महतो, पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी, 20 सूत्री समिति के जिला उपाध्यक्ष मोहन कर्मकार आदि मौजदू थे. कार्यक्रम का संचालन पीके राय ने किया.
सांसद विद्युत महतो ने कहा कि टुसु पर्व झारखंड की विरासत व संस्कृति है. यहां की विरासत महान है, जिसमें लोग ढोल-नगाड़ा की थाप पर झूमते नजर आते हैं. घरों में नई फसल आने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि अगर हमारी संस्कृति खत्म हो जाएगी तो हमारी पहचान ही मिट जाएगी. इसलिये इसे बचाकर रखना हम सबका दायित्व है. उन्होंने आयोजक संस्था तथा खासकर मोहन कर्मकार को इस प्रयास में आगे बढऩे के लिये साधुवाद दिया.
सरयू राय ने कहा कि टुसु पर्व के माध्यम से अपनी परंपरा को बचाकर रखने का संदेश मिलता है, ताकि हमारी नई पीढ़ी इस संबंध में जान सकें. श्री राय ने कहा कि झारखंड के जितने भी पर्व त्यौहार है, सभी जमीन से जुड़ी हुई होती है. मोहन कर्मकार ने बताया कि झारखंड के आदिवासी व मूलवासी का सबसे बड़ा पर्व टुसू है. आज से शुरु हुए यह पर्व आगामी 8-10 दिनों तक राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में चलता रहेगा, जिसमें लोग अपने अनुसार मौज मस्ती करेंगे.
इन्हें मिला आकर्षक नकद ईनाम
मेला में कई आकर्षक टुसू प्रतिमा लेकर लोग पहुंचे थे, जिसमें से चयनकर्ता कमिटी ने चुनकर उन्हें नकद ईनाम देकर पुरस्कृत किया. विजेताओं को अतिथियों ने बारी-बारी से मंच पर आमंत्रित कर ईनाम दिया. इसमें प्रथम पुरस्कार सोसोमोली (राजनगर) के जगन्नाथ महतो को 35 हजार, द्वितीय पुरस्कार पद्मासाई (राजनगर) के धनंजय महतो को 30 हजार, तृतीय पुरस्कार चाडरी (राजनगर) के सोहरी महतो को 25 हजार, चतुर्थ पुरस्कार राजेश को 21 हजार, पांचवा पुरस्कार उज्जवलपुर के डा. गोराई को 15 हजार, छठा पुरस्कार मोतीलाल मार्डी को 12 हजार तथा सातवां पुरस्कार राजखरसावां के देवराज महतो को 10 हजार रु. पुरस्कारस्वरुप दिये गये.
