June 9, 2026

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने समाधि स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा को अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

Screenshot_20260609_170340_Instagram

सर्च न्यूज: सच के साथ: ‘समाजिक न्याय और अधिकारों की रक्षा की प्रेरणा देते हैं बिरसा मुंडा के विचार’

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस (9 जून) के अवसर पर रांची स्थित उनके समाधि स्थल पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ‘धरती आबा’ के बलिदान को याद करते हुए राज्य और देशवासियों को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर पहुँचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और पुष्प अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा ने जल, जंगल, जमीन, स्वाभिमान और आदिवासी-मूलवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने बिरसा मुंडा को शत-शत नमन करते हुए उनके संघर्षों को याद किया, जिन्होंने मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में शहादत दी थीसमारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष, त्याग और विचार आज भी हमें सामाजिक न्याय तथा अधिकारों की रक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ने की निरंतर प्रेरणा देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि धरती आबा का सपना और उनके आदर्श हमारे लिए सदैव मार्गदर्शक रहेंगे। सोरेन ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सरकार भगवान बिरसा के सपनों के अनुरूप समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि झारखंड वीरों की धरती है और यहाँ के लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानते हैं। उन्होंने बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ (क्रांति) का जिक्र करते हुए कहा कि यह संघर्ष ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिलाने वाला था। सोरेन ने राज्य के सभी वीर शहीदों को याद करते हुए ‘जय बिरसा’ और ‘झारखंड के वीर शहीद अमर रहें’ के नारे के साथ अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास और आदिवासियों के गौरव को पुनर्स्थापित करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने पूर्व में यह घोषणा भी की थी कि राज्य का सर्वोच्च सम्मान अब भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू के नाम पर रखा जाएगा। सरकार का लक्ष्य राज्य को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि आने वाले समय में झारखंड अपनी ताकत के बल पर नई पहचान बना सके और हर परिवार के चेहरे पर मुस्कान हो।