March 20, 2026

रांची विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में नामांकन पर रोक

रांची विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में नामांकन पर रोक

रांची विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में नामांकन पर रोक

  • झारखंड उच्च न्यायालय का सख्त आदेश, बुनियादी सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल

Ranchi/Jharkhand : रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित लॉ कॉलेज इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में अगले शैक्षणिक सत्र से नामांकन प्रक्रिया पर झारखंड उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने सुनवाई के दौरान पारित किया।

बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी मुख्य वजह

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि संस्थान में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

प्रमुख कमियां

  • समुचित लाइब्रेरी का अभाव
  • योग्य प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं
    कोर फैकल्टी की कमी
  • जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं, जो विधि शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं।

418 छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट

इस मामले में अंबेश कुमार चौबे और अन्य की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि संस्थान की लापरवाही के कारण करीब 418 छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। प्रार्थी पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल ने अदालत में तर्क रखते हुए संस्थान की खामियों को विस्तार से प्रस्तुत किया।

बीसीआई ने पहले ही दिया था सुधार का निर्देश

मामले में यह भी सामने आया कि अक्टूबर 2025 में बीसीआई ने संस्थान को ईमेल के माध्यम से निर्देश दिया था कि छह महीने के भीतर सभी कमियों को दूर किया जाए, अन्यथा संबद्धता (affiliation) पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद संस्थान द्वारा आवश्यक सुधार नहीं किए गए, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

अदालत का आदेश-पहले सुधार, फिर नामांकन

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने फिलहाल नए नामांकन पर रोक लगाते हुए संस्थान को सभी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है।
बताया गया कि यह संस्थान सरकार के निर्देश पर स्व-वित्त पोषित (self-financed) मॉडल पर संचालित हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद शैक्षणिक मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सका।

शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस आदेश के बाद राज्य में कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता और नियामक व्यवस्था को लेकर फिर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो इसका सीधा असर छात्रों के करियर पर पड़ेगा।