February 11, 2026

श्रीराम का साक्षात दर्शन पाकर धन्य हुए परशुराम, मोक्ष का मिला मार्ग

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सोनारी गीता भवन में चल रहे श्रीराम कथा के पांचवे दिन श्रीराम-सीता स्वयंवर का वर्णन

जमशेदपुर : सोनारी कैलाशनगर स्थित गीता भवन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन गुरुवार को कथावाचक आचार्य रविकांत वत्स (हरियाणा) ने भगवान श्रीराम व सीता स्वयंवर का वर्णन सुनाया. उन्होंने कहा कि सीता स्वयंवर के समय भगवान राम ने शिव का धनुष तोड़ परशुराम का अभिमान को न सिर्फ ध्वस्त किया बल्कि उन्हें मोक्ष का मार्ग भी दिखाया.
आचार्य ने कहा कि शिव का धनुष टूटने के बाद परशुराम क्रोधित होकर राम-लक्ष्मण को साधारण मनुष्य समझकर उनका वध करने पहुंचे थे. उन्हें अभिमान था कि उनसे ज्यादा प्रतापी कोई नहीं, लेकिन भगवान राम ने उन्हें अपना साक्षात दर्शन दिए और उन्हें अपने उद्वार व मोक्ष का मार्ग दिखाते हुए शिव का जाप करने को कहा. इसके बाद राजा जनक ने भगवान राम-सीता का स्वयंवर किया. राजा दशरथ की इच्छा थी कि वे भगवान राम को पूरा राज-पाठ सौंप दें. इससे देवता चिंतित हो गए कि यदि भगवान राम ने राज-पाठ संभाल लिया तो राक्षसों का संहार नहीं हो पाएगा. इसलिए, देवताओं के आग्रह पर माता सरस्वती मंथरा की बुद्धि पर जाकर बैठ गई. उसने कैकयी को दिगभ्रमित किया कि राजा दशरथ राम की सौगंध खा लें तब उनसे दो वर मांगे, पहला भरत को राज सिंहासन और दूसरा, राम को वनवास. जिस राम को अगले दिन राज सिंहासन मिलना था उसने पिता की सौगंध का मान रखने के लिए 14 वर्षों का वनवास ग्रहण किया.