MLA Saryu Roy on Bihar Politics : नीतीश के राज्यसभा जाने पर बोले सरयू राय- बिहार में सत्ता परिवर्तन का तरीका अधिक सम्मानजनक होना चाहिए
Jamshedpur West MLA Saryu Rai
Jamshedpur/Jharkhand : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के फैसले ने न केवल पटना, बल्कि पड़ोसी राज्य झारखंड के सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। इस बड़े राजनैतिक बदलाव पर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाने वाले जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक और जदयू नेता सरयू राय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को बिष्टुपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता का हस्तांतरण लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसका ‘तरीका’ अधिक सम्मानजनक होना चाहिए था।
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नीतीश की विरासत और ‘सम्मान’ का सवाल
सरयू राय ने नीतीश कुमार के पिछले दो दशकों के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2005 से बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका न केवल केंद्रीय रही है, बल्कि उन्होंने ‘सुशासन’ की एक नई परिभाषा गढ़ी है। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने कई मील के पत्थर तय किए। ऐसे में उन्हें अचानक मुख्यमंत्री पद से हटाकर या उनके द्वारा पद छोड़कर राज्यसभा जाने की प्रक्रिया ने कई लोगों को अचंभित और असहज किया है। यदि नीतीश जी स्वयं इस बदलाव के लिए तैयार थे, तब भी इसे पेश करने का ढंग अधिक गौरवपूर्ण और सुव्यवस्थित हो सकता था।
दिल्ली से पटना तक, एक ‘तय पटकथा’ के आरोप
विधायक सरयू राय ने पिछले 48 घंटों की राजनैतिक उठापटक को एक ‘नियोजित घटनाक्रम’ करार दिया। उन्होंने दिल्ली से लेकर पटना तक की गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह से आनन-फानन में फैसले लिए गए, उससे स्पष्ट होता है कि यह सब एक पूर्व-निर्धारित योजना के तहत हुआ है।
सत्ता परिवर्तन और राजनैतिक शुचिता
सरयू राय के अनुसार, नीतीश कुमार ने बिहार में कई ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिए हैं, जिसकी वजह से उन्हें राज्य के विकास का चेहरा माना जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा:
- राजनैतिक गरिमा: वरिष्ठ नेताओं की विदाई या भूमिका परिवर्तन में उनकी वरिष्ठता का ख्याल रखा जाना चाहिए।
- सुशासन का अंत? नीतीश की भूमिका बदलने से बिहार में ‘सुशासन’ के मॉडल पर क्या असर पड़ेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया: बदलाव पारदर्शी और सम्मानजनक होने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहता है।
