February 11, 2026

सच्ची मित्रता और भक्ति का कोई मोल नहीं : रसिया बाबा

IMG-20260121-WA0004

बिष्टुपुर तुलसी भवन में हवन यज्ञ और भंडारे के साथ भागवत कथा का विश्राम

जमशेदपुर : श्रीमद्भागवत कथा के सुदामा चरित्र, कुरुक्षेत्र लीला, श्री कृष्ण उद्धव संवाद के प्रसंगों में निश्छल मित्रता, भगवत्प्राप्ति, भक्ति और वैराग्य का गहरा सार छिपा है, जहाँ सुदामा की दरिद्रता में भी अटूट मित्रता, कृष्ण की लीलाओं से कर्तव्यबोध और उद्धव के माध्यम से ऐश्वर्य त्याग कर ज्ञान (भक्ति) का संदेश दिया जाता है, जो अंततः कथा के विश्राम (समापन) में पूर्णता और परम शांति की ओर ले जाता है. जिससे मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त हो सके. मोह मिटने पर ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है. भागवत कथा बताती है कि कैसे जीवन में सुख-दुःख, धन-निर्धन सब माया है, और केवल भगवत्प्रेम ही सत्य है. यह उद्गार बिष्टुपुर तुलसी भवन में शारणागति परिवार, जमशेदपुर द्धारा आयोजित भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन बुधवार को कथावाचक रसिया बाबा ने व्यासपीठ से कथा का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए व्यक्त किए.
बुधवार को कथा के विश्राम पर हवन यज्ञ और विशाल भंडारे (प्रसाद) का भी आयोजन किया गया. उपस्थित भक्तों ने भागवत कथा के विश्राम पर हवन यज्ञ में पूर्णाहुति दी.
कथावाचक ने कहा कि कथाव्यास ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सुदामा चरित्र की कहानी बताती है कि धन-संपदा महत्वहीन है, सच्ची मित्रता और भक्ति का कोई मोल नहीं. सातों दिन कथा को सफल बनाने में बृजमोहन बागड़ी, विमल रिंगसिया अग्रवाल, प्रदीप मित्तल (बंटी), मनोज शर्मा, सतीश जायसवाल, अजय सरायवाला, राजकुमार दोदराजका, विश्वनाथ महेश्वरी, घनश्याम पटवारी, प्रमीला आगीवाल, तनय झवर, अरुण धूत, राजेश गढ़वाल, नथमल शर्मा, विष्णु अग्रवाल, प्रदीप महेश्वरी, सुनील महेश्वरी, महेश केडिया, मुन्ना तापड़िया, प्रमिला आगीवाल आदि का योगदान रहा.