समाज की खुशहाली व अच्छी फसल के लिए की प्रार्थना
जाहेरथान में जुटे लोग, बाहा पर्व पर मांदर व नगाड़ों की धून पर झूमे
जमशेदपुर : प्रकृति का महान पर्व बाहा के अवसर पर पारंपरिक बाहा गीतों की गूंज और मांदर-नगाड़ों की थाप से मानगो क्षेत्र का दाईघुटु जाहेर थान परिसर उत्सवमय हो उठा. ऊंची इमारतों के बीच स्थित इस स्थल पर चारों ओर पारंपरिक संगीत और संस्कृति की अनूठी छटा बिखरी हुई थी. मानगो क्षेत्र के महिला-पुरुषों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रकृति पर्व सरहुल की खुशियां मनाईं. कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम जाहेरथान में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई, जहां नायके बाबा ने विधि-विधान से मरांग बुरु, जाहेर आयो, मोणे को तथा तुरुय को समेत इष्ट देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की.
इस दौरान नायके बाबा एवं ग्रामीणों ने समाज की खुशहाली, अच्छी फसल तथा प्राकृतिक संतुलन के लिए प्रार्थना की. पूजा संपन्न होने के पश्चात नायके बाबा सवना किस्कु ने देवी-देवताओं के आशीर्वाद स्वरूप उपस्थित दिसुआ ग्रामीणों के बीच सरजम बाहा (सखुआ फूल) का वितरण किया.
सरजम बाहा प्राप्त करते ही पूरा वातावरण उल्लास और श्रद्धा से भर गया. परंपरा के अनुसार महिलाओं ने इन पवित्र फूलों को अपने जूड़े में धारण किया, वहीं पुरुषों ने अपने कानों में सजाया.
इस अवसर पर पारंपरिक बाहा नृत्य का भी भव्य आयोजन हुआ, जिसमें पोड़ेहासा के नृत्य दल के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया. सामाजिक कार्यकर्ता मदन मोहन सोरेन ने कहा कि बाहा पर्व के इस आयोजन न केवल प्रकृति के प्रति आस्था को प्रदर्शित करता है, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक एकता को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है. कहा कि यह उत्सव प्रकृति के प्रति प्रेम के संबंध को जीवंत बनाता है. इस अवसर पर नायके बाबा सवना किस्कु, माझी बाबा बिरेन मुर्मू, शंकर किस्कु, जोगेश्वर बेसरा, फोलर मुर्मू, निमय मुर्मू, बिरसा मुर्मू, सावन बेसरा, सागर बेसरा, दुर्गा किस्कु, प्रेम किस्कु, आदि उपस्थित थे.
