सतनाम-वाहेगुरु का जाप करते हुए सिख समुदाय ने किया नववर्ष में प्रवेश
● प्रकाशोत्सव को समर्पित “नवां साल गुरु दे नाल” कीर्तन दीवान में होती रही गुरु ग्रंथ साहिब पर पुष्पवर्षा
● भाई सरूप सिंह ने “जो ना भजने नारायणा, तिन का मैं न करूं दर्शना” सबद गाकर संगत को किया भाव विभोर
जमशेदपुर : साल के अंतिम दो दिन सिख पंथ की दसवीं पातशाही, पिता कलगीधर दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाशोत्सव को समर्पित महान कीर्तन दरबार “नवां साल गुरु दे नाल” में शामिल हुई संगत सतनाम-वाहेगुरु का जाप करते हुई गुरु ग्रंथ साहिब को ओट में पुष्पवर्षा कर नए साल का स्वागत करते 2026 में प्रवेश किया. बुधवार को गुरुद्वारा मैदान में कीर्तन दीवान के दूसरे और अंतिम दिन सतनाम-वाहेगुरु का जाप और बोले सो निहाल सतश्रीअकाल का जयकारा पूरे दीवान में श्रद्धा और आस्था भाव से गूंजता रहा.
खालसा सेवा दल के तत्वाधान में गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के सहयोग से आयोजित महान कीर्तन दरबार में गुरबानी की ऐसी अमृतवर्ष हुई कि संगत की उपस्थिति से सुसज्जित पंडाल भी छोटा पड़ गया. क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग, युवा पीढ़ी, बीबियां सहित सहित उम्रवर्ग के लोगों ने दीवान में हाजरी भर गुरु घर की खुशियां प्राप्त कीं. हजूरी रागी भाई सरूप सिंह ने “जो ना भजने नारायणा, तिन का मैं न करूं दर्शना” सबद की ऐसी धुन लगायी कि संगत भाव विभोर हो उठी.
बुधवार के दीवान की शुरुआत भाई साहब भाई नारायण सिंह हजूरी रागी गुरुद्वारा साहिब साकची ने की उपरांत भाई साहब भाई निर्मल सिंह टाटानगर वाले ने “तू करता सच्यार मैंडा साईं” कीर्तन गायन किया. मंच का संचालन परमजीत सिंह काले कर रहे थे. इस अवसर पर साकची के प्रधान सरदार निशान सिंह, अमरप्रीत सिंह काले, बिष्टुपुर से प्रकाश सिंह, टेल्को से बलविंदर सिंह, गुरमीत सिंह तोते, डॉ राजेंद्र सिंह, बाबा इकबाल सिंह, सविंदर सिंह, चंचल भाटिया, सतबीर सिंह सोमू, दलबीर सिंह दल्ली, इंद्रजीत सिंह कपूर, तरसेम सिंह, सीतारामडेरा से गुरदीप सिंह, अकाली दल से रविंदर सिंह, सुखदेव सिंह खालसा, रामकिशन सिंह, सोनारी से तारा सिंह, अधिवक्ता कुलबिन्दर सिंह समेत कई गणमान्य हस्तियां समागम में शामिल हुई. साकची गुरुद्वारा मैदान में कीर्तन समागम वर्ष के अंतिम दो दिन 30 एवं 31 दिसंबर को गुरु साहिब के चरणों में नवां साल मनाने की अनुपम भावना और श्रद्धा-भक्ति भाव से ओत-प्रोत रहा. सिख पंथ के प्रख्यात रागी जत्थों की उपस्थिति ने इस समागम को और भी दिव्य बना दिया. भाई सरूप सिंह (हजूरी रागी श्री दरबार साहिब, अमृतसर), बीबी जसप्रीत कौर (पटियाला वाले), ज्ञानी जजबीर सिंह (मुख्य ग्रंथी तरनतारन) तथा भाई नारायण सिंह (हजूरी रागी साकची गुरुद्वारा साहिब), स्थानीय रागी गुरदीप सिंह निक्कू और निर्मल सिंह ने अपने मंत्रमुग्ध कर देने वाले सबद-कीर्तन से संगत को गुरु चरणों में लीन रखा. इस पवित्र आयोजन की सफलता में सन्नी सिंह बरियार, परमजीत सिंह काले, सतबीर सिंह गोल्डू, अमरपाल सिंह, प्रीतपाल सिंह, गुरबख्श सिंह बख्शी, सोनी सिंह, श्याम सिंह, मनप्रीत सिंह मणि, अमन सिंह तथा अन्य सदस्यों का सहयोग प्राप्त हुआ.
