February 11, 2026

तीन दिनों तक साहित्यिक चर्चा का गवाह बनेगा गोपाल मैदान

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9 से 11 जनवरी तक जुटेंगे साहित्यकार, कवि, लेखक, इतिहासकार, विचारक व सांस्कृतिक कर्मी

जमशेदपुर : जिला प्रशासन द्वारा प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव का आयोजन आगामी 9 से 11 जनवरी, 2026 तक बिष्टुपुर गोपाल मैदान में किया जाएगा. यह उत्सव साहित्य, कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत के संरक्षण व प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. तीन दिवसीय आयोजन में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लेखक, इतिहासकार, विचारक एवं सांस्कृतिक कर्मी भाग लेंगे.
साहित्य उत्सव में जिन प्रमुख साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की सहभागिता होगी, उनमें पद्मश्री डॉ. जानुम सिंह सोय, पद्मश्री हलधर नाग, पद्मश्री डॉ. पुष्पेश पंत, डॉ. नारायण उरांव, डॉ. अनुज लुगुन, डॉ. पार्वती तिर्की, डॉ. अशोक कुमार सेन, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, डॉ. हिमांशु वाजपेयी, डॉ. सुरिंदर सिंह जोधका, डॉ. नेहा तिवारी, जेरी पिंटो, नीलोत्पल मृणाल, चंद्रहास चौधरी, महादेव टोप्पो, संजय कच्छप, निरंजन कुजूर, रणेन्द्र कुमार, रजा काजमी, विक्रम ग्रेवाल, अक्षय बहिबाला, राहुल पंडिता, सौरव रॉय, प्रेमचंद उरांव, रविंद्रनाथ मुर्मू, यदुंवश प्रणय, अनुकृति उपाध्याय, जोबा मुर्मू, शताब्दी मिश्रा सहित अनेक साहित्यकार शामिल हैं.
आयोजन के संबंध में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि इस साहित्य उत्सव का उद्देश्य साहित्य को जन-जन तक पहुंचाना, युवा रचनाकारों को मंच प्रदान करना तथा पूर्वी सिंहभूम को साहित्यिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाना है. जिला प्रशासन, पूर्वी सिंहभूम का जिले के सभी साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों, युवाओं एवं आम नागरिकों से अपील है कि इस साहित्य उत्सव में सहभागिता कर इसे सफल बनाएं.

कार्यक्रम का विवरण
प्रथम दिन उद्घाटन सत्र के उपरांत झारखंड : आदिवासी भाषा-साहित्य की विश्व दृष्टि, आदिवासी इतिहास का अध्याय, ‘होर रोर’ की कहानी, मिट्टी की भाषा तथा दास्तान रानी लक्ष्मीबाई की आदि पर चर्चा होगी.
द्वितीय दिन पुस्तकालय से जन आंदोलन तक कुड़ुख भाषा साहित्य पर वार्ता लोकस्वर की जीवंत परंपरा, नीलोत्पल मृणाल के बायस्कोप से देखी दुनिया आदि पर चर्चा होगी. वहीं तृतीय व अंतिम दिन महाश्वेता देवी सदी स्मरण : उनकी आदिवासी रचनाओं में इतिहास, मिथक और आख्यान, एक जंगल हुआ करता था, अदृश्य कहानियों का कथाकार आदि विषयों पर साहित्यिक चर्चा होगी. इसीदिन अपराह्न 5.30 बजे से समापन समारोह आयोजित होगा.

लाइव पेंटिंग व ग्लिटर आर्ट होगा आकर्षण

समारोह में साहित्यिक सत्रों के साथ-साथ दर्शकों के लिए लाइव ग्लिटर आर्ट, लाइव पेंटिंग, लाइव पॉटरी, लाइव बैंड परफॉर्मेंस, जनजातीय नृत्य द्वारा पारंपरिक स्वागत, नाट्य प्रस्तुति ‘लोहे का आदमी और लोहारिन’, स्थानीय छऊ नृत्य, जनजातीय खेलों की प्रस्तुति एवं पुस्तक/कहानी स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र होंगे.