February 16, 2026

शत्रु भाव से आईं दैत्यनी को भी मोक्ष प्रदान करते हैं भगवान

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स्वामी सर्वानंद जी महाराज की अमृतवाणी से गूंजा श्री रामलीला मैदान

जमशेदपुर : साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन वृंदावन धाम से आये स्वामी सर्वानंद जी महाराज की वाणी ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया. श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री राम-कृष्ण मित्र मंडल द्वारा आयोजित इस आयोजन में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण रहा. पूतना उद्धार प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान शत्रु भाव से आई दैत्यनी को भी मातृत्व का स्थान देकर मोक्ष प्रदान करते हैं. इससे यह संदेश मिलता है कि ईश्वर केवल भाव देखते हैं.
स्वामी जी ने कहा कि भगवान शक्ति या वैभव से नहीं, बल्कि नि:स्वार्थ प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होते हैं. उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म के उपरांत नंदोत्सव का वर्णन करते हुए बताया कि जब नंद बाबा के आंगन में आनंद का प्रकाश फैला, तब पूरा गोकुल आनंद में झूम उठा. यह उत्सव केवल एक बालक के जन्म का नहीं, बल्कि धर्म और दिव्यता के अवतरण का प्रतीक है. स्वामी जी ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि शिव और कृष्ण एक ही परम सत्य के दो स्वरूप हैं. साथ ही जप, तप, उपवास और रुद्राभिषेक के महत्व पर प्रकाश डाला तथा जीवन में संयम, सेवा और साधना अपनाने का आह्वान किया. कथा के समापन पर सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया. आज की कथा में यजमान के रूप में भारत भूषण त्रिवेदी, द्वारिका प्रसाद एवं राजेश अग्रवाल ने परिवार सहित पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया.