February 11, 2026

शारीरिक अक्षमवाले पति से ईष्र्या करनेवाली पत्नियां जाती हैं नरक में

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सोनारी गीता भवन में चल रहे श्रीराम कथा के सातवें दिन अरण्य कांड व किष्किंधा कांड का वर्णन

जमशेदपुर : सोनारी कैलाशनगर स्थित गीता भवन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथावाचक आचार्य रविकांत वत्स (हरियाणा) ने अरण्य कांड और किष्किंधा कांड का वर्णन भक्तों से किया. उन्होंने कहा कि ऋषि अत्रेय की पत्नी माता अनसुइया ने सीता को पवित्रता धर्म की शिक्षा दी. बताया कि पति को छोडक़र पर पुरुष का मुख नहीं देखना उत्तम है.
आचार्य ने बताया भगवान राम चित्रकूट पर्वत छोडक़र जब अत्रेय ऋषि के पास पहुंचे तो माता अनसुइया ने सीता को शिक्षा देते हुए कहा कि हमेशा पर पुरुष को भाई, पिता और पुत्र के समान देखना चाहिए. जो किसी डर से पवित्रता धर्म को धारण कर मौका मिलते ही अन्य पुरुष से रति करती है वह निम्न नारी कहलाती है. इसके अलावा जो पत्नी अपने अंधे, बहरे, रोगी, लंगड़े, मुर्ख पति से ईष्या करती है वह घोर नरक में जाती है. आचार्य ने कहा कि ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी, जब विपत्ति आती है तो इन्हें परखना चाहिए. उन्होंने अगस्त ऋषि से आज्ञा लेकर दंडक वन के पंचवटी में आश्रम बनाने, सुपर्णा का नाक काटना, खरदूषण व मरीच राक्षस का वध, रावण द्वारा माता सीता का हरण, भगवान राम का सबरी के जूठे बेर खाना, भक्त हनुमान का निष्काम प्रेम और प्रभु श्रीराम से मिलना, सुग्रीव से मित्रता, बलि का वध और सुग्रीव को राज-पाठ दिलाने की कथा का वर्णन किया. अपराह्न साढ़े तीन बजे से शुरू हुई कथा शाम साढ़े छह बजे तक चली. समापन के बाद बनारस के अस्सी घाट से आए पुरोहित साकेत पांडेय व सात सदस्यीय ब्राहणों ने भगवान राम सहित व्यास पीठ की आरती कर उपस्थित श्रोताओं के बीच प्रसाद का वितरण किया.