भागवत कथा में श्रीकृष्ण के कई प्रसंगों की चर्चा
बिष्टुपुर तुलसी भवन में आयोजन का पांचवा दिन
जमशेदपुर : भागवत कथा में पूतना उद्धार, कृष्णजी का नामकरण, माखन लीला, काली मर्दन, चीर हरण और गोवर्धन पूजा प्रमुख प्रसंग है, जो भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाते हैं. इससे भक्तों का कल्याण होता है और उनकी भक्ति बढ़ती है. उक्त बातें बिष्टुपुर तुलसी भवन में शारणागति परिवार द्धारा आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक रसिया बाबा ने कही. उन्होंने कहा कि वासुदेव और देवकी के पुत्र कृष्ण के जन्म के बाद, विभिन्न ऋषियों और नन्द-यशोदा द्वारा उनका नामकरण किया गया.
उन्होंने कहा कि बालकृष्ण अपनी सखियों (गोपियों) के घरों से माखन चुराकर खाते थे, जिसे वे स्वयं भी खाते और दूसरों को खिलाते थे. कथावाचक ने चीर हरण लीला की कथा के प्रसंग में बताया कि गोपियां यमुना में स्नान कर रही थीं, तब बाल कृष्ण ने उनके वस्त्रों को पेड़ पर रख दिया और उन्हें वस्त्र लौटाने के बदले में राधा-कृष्ण का स्मरण करने को कहा, जिससे गोपियों की लाज और भक्ति दोनों की परीक्षा हुई. आज के मुख्य यजमान उषा-बृज मोहन बागड़ी, मंजू-विश्वनाथ माहेश्वरी, गोवर्धन गुप्ता थे. कथा के छठवें दिन कल, महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध, उद्धव गोपी संवाद, रूकमणी विवाह आदि प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी.

