March 19, 2026

‘बिरीह भिगोना’ संपन्न, रोपण व ज्वारा का अखंड ज्योत प्रजवल्लन गुरुवार को

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जमशेदपुर : श्री श्री शीतला माता मंदिर टुईलाडुंगरी में चैत्र नवरात्रि ज्वारा की प्रारंभिक विधि ‘बिरीह भिगोना’ आज मंदिर परिसर में माता शीतला की पूजा के साथ संपन्न हुई. छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुरूप ‘बिरीह भिगोना’ ज्योत प्रज्वलन के एकदिन पूर्व सात प्रकार के अनाज गैंहु, जौ, उड़द, चना, मटर, मूंग, मसूर का मिश्रण कर समाज के प्रमुख लोगो द्वारा अपने हाथो से पांच-पांच मुट्ठी एक मिट्टी के बड़े पात्र में पानी के साथ डाल कर भिगाया गया है और कल, गुरुवार को प्रातः खाद और मिट्टी के साथ उसका रोपण किया जाएगा. संध्या बेला में 23 अखंड ज्योत का प्रज्वलन होगा.
‘बिरिह भिगोना’ के बाद मंदिर समिति के स्थानीय जश गायन मंडली द्वारा जश गीत और भजन प्रस्तुत किए गए. कल मंदिर में ज्योत ज्वारा का प्रज्वलन संध्या 4 बजे किया जाएगा और उसके बाद छत्तीसगढ़ से आए जश गायन मंडली के द्वारा नौ दिनों तक जश गायन होगा और मां की सेवा की जाएगी. आज के बिरिह भिगोना कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार, परमानंद कौशल, गिरधारी साहू, खलेश्वर साहू, शुक्रीतदास मानिकपुरी, चंद्रभूषण, त्रिवेणी कुमार, महावीर प्रसाद, मोतीलाल साहू, बिरेंद्र साहू, अनिल कुमार, धर्मेंद्र साहू, प्रसाद राव, इंद्रा साहू, फूलो देवी, दयालु निषाद, नूतन साहू, मंजू ठाकुर, रोशन साहू, विजय दास मानिकपुरी, दीपक साहू, गंगाराम साहू, बिहारी लाल, लक्ष्मी निषाद, कमला निषाद, बबली साहू, नरेश निषाद, पूनम ठाकुर, गौरी साहू, मंजू साहू, देववती, ओम निषाद, बेला सिंह, आरती देवी आदि उपस्थित थे.

● ‘बिरीह भिगोना’ पर यह है मान्यता

ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा और शिव द्वारा इस विधि विधान की शुरुवात की गई थी, मानना है की अनाज के मिश्रण से जो ज्वारा उत्पन्न होता है उसके रंगो से प्रगति का अनुमान लगाया जाता है. अगर ज्वारा सफेद और हरे रंग का होता है तो यह माना जाता है कि क्षेत्र और समाज की प्रगति और उन्नति निरंतर बनी रहेगी और अगर आधा हरा और आधा पीला ज्वारा होता है तो वर्ष का आधा वर्ष अमन चैन के साथ और आधा वर्ष कष्ट से बीतते है.