घर के बालकॉनी में भी हो सकता है बायो गैस का उत्पादन
● डीबीएमएस कॉलेज में कार्यशाला
जमशेदपुर : डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन में कोरू फाउंडेशन के सहयोग से ‘ग्रीन एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी : सतत विकास का भविष्य’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमे झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षक शामिल हुए. डीबीएमएस ट्रस्ट के चेयरपर्सन डॉ. बी चंद्रशेखर ने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया. मुख्य अतिथि प्रभात सिंह (समन्वयक, वोकेशनल सेल, कोल्हान विश्वविद्यालय) ने कहा कि सतत विकास की दिशा में उठाए गए छोटे-छोटे कदम भी दूरगामी परिणाम दे सकते हैं. उन्होंने टाटा स्टील का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ बायोगैस से संचालित मेस संकट के समय भी सुचारु रूप से कार्य करती रही, जो हरित ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है.
प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. अमर कुमार ने कहा कि प्रकृति के पास हमारी कई समस्याओं के समाधान मौजूद हैं, आवश्यकता उन्हें खोजने की है. ‘स्वच्छता पुकारे’ के निदेशक गौरव आनंद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बायोगैस का उत्पादन घरों में, यहाँ तक कि बालकनी में भी किया जा सकता है. उन्होंने बायोगैस निर्माण की प्रक्रिया समझाई और प्लास्टिक से सड़कों के निर्माण की तकनीक पर भी प्रकाश डाला.
इस दौरान बी.एड के प्रथम एवं द्वितीय सत्र के छात्रों ने पर्यावरण पर आधारित मॉडल का प्रदर्शन किया. समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉक्टर विक्रांत तिवारी (डायरेक्टर, आदिवासी डॉट ओआरजी) ने अपने अनुभवों के आधार पर छात्रों को पर्यावरण बचाने के अनेक तरीके बताएं. अमृता चौधरी की टीम ने पर्यावरण गीत प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सुधा दिलीप, सतीश सिंह , प्राचार्या डॉ.जूही समर्पिता, डॉ. मोनिका उप्पल, शिक्षिकाएं एवं सभी कर्मचारी उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन मौसमी दत्ता एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मोनिका उप्पल ने किया.
