भारत की अर्थव्यवस्था पिछले तीन दशकों में तेजी से आगे बढ़ी है। देश आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, डिजिटल क्रांति से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक हर क्षेत्र में बदलाव दिखाई देता है। लेकिन इस चमकती तस्वीर के पीछे एक ऐसा वर्ग भी है, जो धीरे-धीरे दबाव में आता जा रहा है — देश का मिडिल क्लास।
आज मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी समस्या है बढ़ती महंगाई और सीमित आय वृद्धि। रोजमर्रा की जरूरतों जैसे शिक्षा, इलाज, घर का किराया, बिजली बिल और खाने-पीने की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि आम नौकरीपेशा लोगों की सैलरी उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पा रही। इसका असर सीधे उनके जीवन स्तर और बचत पर पड़ रहा है।
एक समय था जब मिडिल क्लास को देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता था। यही वर्ग टैक्स देता है, बाजार चलाता है और देश की खपत को मजबूत बनाता है। लेकिन अब यही वर्ग खुद आर्थिक असुरक्षा महसूस कर रहा है। न तो उन्हें गरीबों वाली सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है और न ही अमीरों जैसी आर्थिक सुरक्षा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल क्लास कमजोर होता गया, तो इसका असर देश की आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ेगा। क्योंकि यही वर्ग सबसे ज्यादा खर्च करता है, छोटे व्यवसायों को सहारा देता है और नई अर्थव्यवस्था को गति देता है।
सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ विकास दर बढ़ाना नहीं, बल्कि उस विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। रोजगार के अवसर बढ़ाना, टैक्स में राहत देना और शिक्षा-स्वास्थ्य को सस्ता बनाना जैसे कदम मिडिल क्लास को राहत दे सकते हैं।
भारत की तरक्की तभी मजबूत मानी जाएगी, जब देश का मध्यम वर्ग खुद को सुरक्षित, स्थिर और आगे बढ़ता हुआ महसूस करे।