हिंडालको पर 37.96 लाख का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड अधिरोपित
मामला : बिना पर्यावरणीय अनुमति लिये एनएचएआई को दो लाख टन रेड मड की आपूर्ति का
जमशेदपुर : झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पर्यावरणीय अनुमति लिए बिना 2 लाख टन रेड मड की आपूर्ति एनएचएआई को करने के लिए हिंडालको इन्डस्ट्रीज पर 37,96,875 रूपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड अधिरोपित किया है. यह जानकारी आज झारखंड सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने झारखंड विधानसभा में विधायक सरयू राय के तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया है. विभाग ने अपने उत्तर में कहा है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के गाईडलाईन के अनुसार बिना पर्यावरणीय अनुमति लिए केवल एक हजार किलोग्राम अर्थात एक टन रेड मड की ही आपूर्ति किसी संस्था को प्रयोग के लिए की जा सकती है, परन्तु इसका उल्लंघन कर हिंडालको इंडस्ट्रीज के मूरी वर्कस ने गोला-ओरमांझी पथ निर्माण के ट्रायल में उपयोग के लिए एनएचएआई को 2 लाख टन रेड मड की आपूर्ति बिना राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से अनुमोदन लिए ही कर दिया गया था.
श्री राय ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से पूछा था कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से अनुमोदन प्राप्त किए बिना हिंडालको इन्डस्ट्रीज के मूरी वर्कस द्वारा 2 लाख टन रेड मड की आपूर्ति एनएचएआई को करना पर्यावरण नियमों के विरूद्ध है और सरकार के द्वारा इस पर क्या कार्रवाई की गई है. दरअसल रेड मड की आपूर्ति गत 22 अक्टूबर, 2024 को ही कर दिया गया था, परन्तु दो वर्षों तक राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने कोई कार्रवाई नहीं की. विधायक श्री राय के विधानसभा में इस आशय का प्रश्न करने के बाद ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के एवज में हिंडालको पर 37,96,875 रु. का अर्थदण्ड अधिरोपित करने की जानकारी विभाग ने दी है.
