शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भक्तों ने लगाये जयकारे
बारीडीह विजया गार्डेन में नौ दिवसीय रामकथा का तीसरा दिन
जमशेदपुर : विजया सेंट्रल कमेटी के तत्वावधान में विजया गार्डेन बारीडीह में नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन शुक्रवार को शिव-पार्वती विवाह प्रसंग की व्याख्या की गयी. कल भी इसी प्रसंग की व्याख्या होगी. उज्जैन की कथावाचक ममता ने कहा कि हिमालयराज की पुत्री पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया. उनके तप, निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर शिवजी ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया. देवर्षि नारद के माध्यम से यह समाचार हिमालय पहुंचा और विवाह की तैयारी होने लगी. विवाह के दिन कैलाश पर्वत पर अद्भुत दृश्य था. देवता, ऋषि, सिद्ध, गंधर्व सभी आमंत्रित थे. परंतु शिव बारात में भस्म लगाए, जटाधारी, नागों से अलंकृत और गणों के साथ पहुंचे. बारात का विचित्र रूप देखकर माता मैना क्षणभर विचलित हो गईं, किंतु पार्वती की अटूट श्रद्धा और प्रेम ने सब शंकाएं दूर कर दीं. शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ. यह विवाह वैराग्य और गृहस्थी, शक्ति और चेतना के दिव्य संयोग का प्रतीक है.
कथावाचक ने रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के जरिये वर्तमान परिस्थिति में जीवन व उससे जुड़ी चुनौतियों की व्याख्या भी की. कथा के उपरांत आरती हुई और सभी को प्रसाद वितरण किया गया. आयोजन में विनय सिंह, मुकेश कुमार, कौशल सिंह, नवीन वर्मा, राजेश सिंह, पी के बस्तिया, परशुराम सिंह, अजय कुमार, अरविंद सिंह व अन्य का योगदान रहा. कथा के नौवां व अंतिम दिन 26 दिसंबर को सभी श्रद्धालुओं के लिए महाभोग की व्यवस्था की जाएगी.

