March 15, 2026

जालंधर वध कथा अहंकार के विनाश व धर्म की स्थापना का प्रतीक

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बिष्टुपुर मारवाड़ी मंदिर में चल रहे शिव महापुराण कथा का पांचवा दिन, पूर्णाहूति सोमवार को

जमशेदपुर : शिव महापुराण में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन अत्यंत पावन और कल्याणकारी है, जो शिव के ज्योति स्वरूप का प्रतिपादन करते हैं. ज्ञानसंहिता में शिवजी ने स्वयं इन बारह स्थानों को अपने प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्वरूप बताया है, जहां दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह कथा भक्तों को शिव के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति का संदेश देती है. ये बातें बिष्टुपुर सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में चल रहे शिव महापुराण कथा के पाचवें दिन शनिवार को कथावाचक स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने जालंधर वध, द्धादश ज्योतिर्लिग वर्णन कथा का प्रसंग सुनाते हुए कही. उन्होंने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम का सुबह-शाम स्मरण करने मात्र से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं. जालंधर का वध अहंकार के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है.
छठे दिन, कल रविवार को कथावाचक बाणासुर, अंधकासुर, भस्मासुर कथा का प्रसंग तथा सातवें दिन सोमवार को पंचाक्षर महिमा का वर्णन और हवन पूर्णाहूति के साथ कथा का विश्राम होगा. मुख्य यजमान पुष्पा देवी-रामा कांत साह और अंचल-मनीष कश्यप थे. आज भी संस्था से जुड़े 11 जोड़ो ने पूजा करायी. रोजाना की तरह आज भी अपराह्न 3 से शाम 6 बजे तक काफी संख्या में भक्तगण शामिल होकर कथा का आनन्द लिया. इसका आयोजन धार्मिक संस्था मित्र कांवड संघ टाटानगर द्वारा किया जा रहा है.