April 8, 2026

Jamshedpur DBMS Principal Selection Virodh : फ़ीस कानून का विरोध करनेवालों को क्यों मिली जिम्मेदारी?

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‘शिक्षा सत्याग्रह’ संग अभिभावकों ने जताई आपत्ति, पद से हटाने की मांग

जमशेदपुर : जिलास्तरीय स्कूल शुल्क निर्धारण समिति में डीबीएमएस स्कूल की प्रिंसिपल को सदस्य बनाने पर विवाद गहराता जा रहा है. इस निर्णय के खिलाफ ‘शिक्षा सत्याग्रह’ के तत्वावधान में कई अभिभावक प्रतिनिधियों ने विरोध दर्ज कराया है. अभिभावकों का कहना है कि जिस स्कूल प्रबंधन ने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 का विरोध करते हुए वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और वर्ष 2024 तक मामले को लंबित रखकर बाद में वापस ले लिया, उसी संस्थान के प्रतिनिधि को समिति में शामिल करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है. शिकायतकर्ता अंकित आनंद ने इस संबंध में जिलास्तरीय शुल्क निर्धारण समिति के अध्यक्ष सह उपायुक्त तथा जिला शिक्षा अधीक्षक को विधिक प्रतिवेदन सौंपा गया है.
इस संबंध में टेल्को स्थित लिटिल फ्लॉवर स्कूल के समक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीबीएमएस प्रिंसिपल के मनोनयन पर विरोध दर्ज किया गया, साथ ही उच्च न्यायालय के फाइनल ऑर्डर की कॉपी भी दर्शाया गया. शिकायत में कहा गया है कि जो शिक्षण संस्थान एवं उनके पोषित प्रतिनिधि स्वयं कानून का पालन नहीं करते या उसे लटकाने, अटकाने और भटकाने का प्रयास करते हैं, उन्हें नियामक समिति में स्थान देना सही नहीं है. इसे अभिभावकों के हितों के साथ ‘षड्यंत्र’ करार दिया गया. सिर्फ उन स्कूलों के प्रिंसिपल को समिति में स्थान मिलना चाहिए, जिन्होंने सरकार के फीस कानून का सम्मान किया हो या विरोध नहीं किया हो. प्रेस वार्ता में वीर कुमार सिंह, सागर राय, अप्पू तिवारी, अंकित आनंद, हर्ष अग्रवाल, हृतिक चौबे, प्रकाश ठाकुर, रविश सिंह समेत कई अभिभावक एवं शिक्षा सत्याग्रह के सदस्य मौजूद थे.

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फीस वृद्धि की जांच की मांग


अभिभावकों ने वर्ष 2019 से 2026 तक सभी निजी स्कूलों द्वारा की गई फीस वृद्धि की जिला स्तरीय समीक्षा कराने की मांग की. उनका कहना है कि नियम के अनुसार प्रत्येक दो वर्षों में 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं होनी चाहिए, लेकिन कई स्कूलों में इसका उल्लंघन हुआ है. इसके लिए जिला समिति द्वारा एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त कर सभी स्कूलों का पिछले 10 वर्षों का ऑडिट कराने की मांग भी उठाई गई.

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