जब भी मन अशांत हो तो भागवत कथा सुनें, शांति मिलेगी
बिष्टुपुर तुलसी भवन में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुरु, भक्तों के साथ निकाली कलश यात्रा
जमशेदपुर : भागवत कथा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सीखने का उचित माध्यम है. प्रत्येक मनुष्य को पुण्य प्राप्त करने के लिए भागवत कथा सुननी चाहिए. जीवन में जब भी अधूरापन लगता है तो मन अशांत हो जाता है. हमें शांति कैसे मिलेगी, इस प्रश्न का उत्तर श्रीमद् भागवत कथा में शुकदेव जी और राजा परीक्षित के प्रसंग में मिलता है. उक्त बातें शारणागति परिवार द्धारा आयोजित भागवत कथा के प्रथम दिन वृंदावन से आये कथावाचक रसिया बाबा ने श्रीमद भागवत महात्म, परीक्षित शुकदेव संवाद कथा का प्रसंग सुनाते हुए कही.
कथा के दूसरे दिन कल, शुक्रवार को सृष्टि कर्म, वाराह चरित्र, धर्म परिवार वर्णन, शिव विवाह वर्णन आदि प्रसंगों की व्याख्या भजनों के साथ की जाएगी. इस क्रम में 18 जनवरी को प्रात: 10 बजे से तुलसी भवन में 108 श्री लड्डू गोपाल अभिषेकम का आयोजन रसिया बाबा की कृपा से आयोजित होगा. सात दिवसीय श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव कथा का आयोजन 21 जनवरी तक होगा. आज सुबह कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ. रसिया बाबा के सानिध्य में गोस्वामी मंदिर बिष्टुपुर में भागवत पोथी की पूजा अर्चना के साथ कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ, जो तुलसी भवन तक पहुंचा. पूजा के मुख्य यजमान उषा-ब्रिज मोहन बागड़ी, कमला-राजकुमार दोदराजका, घनश्याम पटवारी, प्रमिला आगीवाल थे. मौके पर छीतरमल धुत, कैलाश अग्रवाल, लक्ष्मण शर्मा, रतन मेंगोतिया, श्रवण देबुका आदि ने हाजिरी लगाई.
