March 15, 2026

Jharkhand Assembly News : ब्राउन शुगर समेत नशीले पदार्थों पर पर नकेल के लिए हर जिले में बनेगा टास्क फोर्स

Jharkhand Assembly

Jharkhand Assembly (Symbolic Photo)

  • फार्मेसी काउंसिल नियुक्ति विवाद की होगी उच्चस्तरीय जांच

Ranchi/Jharkhand : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन शनिवार को सदन के भीतर नशे के बढ़ते कारोबार और प्रशासनिक नियुक्तियों में अनियमितता के मुद्दों पर गरमागरम बहस हुई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहे ड्रग माफियाओं के खिलाफ अब जिला स्तर पर ‘विशेष टास्क फोर्स’ (Task Force) का गठन किया जाएगा। वहीं, फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

हजारीबाग-रामगढ़ में ‘सफेद जहर’ का कहर, विधायक ने मांगा जवाब

सदन की कार्यवाही के दौरान बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने राज्य में फैल रहे अवैध ड्रग्स नेटवर्क का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया। उन्होंने बताया कि हजारीबाग, रामगढ़, पतरातू, बड़कागांव और केरेडारी जैसे क्षेत्र ‘सफेद जहर’ (हीरोइन और ब्राउन शुगर) की चपेट में हैं।

विधायक ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 2396 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन 2023 के बाद इन मामलों में जिलावार रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने करोड़ों रुपये के ड्रग्स बरामदगी का हवाला देते हुए सरकार से पूछा कि क्या ड्रग माफियाओं को जड़ से मिटाने के लिए कोई विशेष योजना है?

मंत्री योगेंद्र महतो का एलान: माफियाओं पर कसी जाएगी नकेल

विधायक के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र महतो ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार नशामुक्त झारखंड के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार हर जिले में एक समर्पित टास्क फोर्स गठित करने की योजना बना रही है। यह फोर्स स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ड्रग तस्करी के खिलाफ व्यापक ‘एंटी-नारकोटिक्स’ अभियान चलाएगी, ताकि युवाओं को इस लत से बचाया जा सके।

फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार नियुक्ति की होगी जांच

सदन में दूसरा बड़ा मुद्दा विधायक सरयू राय ने उठाया। उन्होंने झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद में रजिस्ट्रार की नियुक्ति में भारी अनियमितता का आरोप लगाया। सरयू राय ने सीधे तौर पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को घेरते हुए कहा कि नियमों को ताक पर रखकर प्रशांत कुमार पांडेय की नियुक्ति की गई थी। उन्हें केवल 6 महीने के लिए रखा गया था, लेकिन वे अब भी पद पर जमे हुए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का सख्त रुख

विधायक के आरोपों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है या तथ्यों को छिपाया गया है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है।” इसके साथ ही, डिप्लोमा-इन-फार्मेसी परीक्षा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति के दौरान विधानसभा को अधूरी जानकारी देने के मुद्दे पर भी मंत्री ने जांच का भरोसा दिलाया है।

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