ABVP JTET Protest : JTET नियमावली से भोजपुरी-मगही हटाने पर ABVP ने सरकार पर लगाया विश्वासघात का आरोप, भाषाई भेदभाव के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
ABVP JTET Protest.
Ranchi : झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की नई नियमावली को लेकर एक बार फिर भाषाई विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के झारखंड प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार द्वारा जेटीईटी से भोजपुरी और मगही भाषाओं को बाहर करने के निर्णय की तीखी आलोचना की है। रविवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अभाविप ने इसे राज्य के लाखों युवाओं के साथ घोर विश्वासघात और दुर्भाग्यपूर्ण कदम करार दिया। परिषद का मानना है कि यह निर्णय न केवल भाषाई विविधता के खिलाफ है, बल्कि राज्य को सामाजिक फूट और आंतरिक कलह की ओर धकेलने वाला एक खतरनाक प्रयास है।
पलामू और उत्तरी झारखंड के लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट
अभाविप नेता प्रकाश टूटी ने सरकार के इस फैसले को क्षेत्रीय संतुलन और भाषाई न्याय के विरुद्ध बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि पलामू प्रमंडल सहित उत्तरी झारखंड के एक बड़े हिस्से में लाखों लोग भोजपुरी और मगही को अपनी मातृभाषा के रूप में अपनाते हैं। ये भाषाएं वहां के जनजीवन, संस्कृति और प्राथमिक शिक्षा का अभिन्न अंग हैं। सरकार द्वारा इन भाषाओं को नजरअंदाज करने का सीधा अर्थ है कि इन क्षेत्रों के युवाओं की योग्यता और उनके रोजगार के अवसरों पर जानबूझकर प्रहार किया जा रहा है। टूटी ने कहा कि इस फैसले से लाखों मेधावी छात्र जेटीईटी परीक्षा की प्रक्रिया से वंचित हो सकते हैं, जो उनके करियर के लिए एक बड़ा सेटबैक साबित होगा।
विफलताओं को छिपाने की साजिश और ‘भाषा थोपने’ का आरोप
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए अभाविप ने आरोप लगाया कि राज्य गठन के समय जिस भाषाई विविधता और स्थानीयता को बढ़ावा देने का वादा किया गया था, वर्तमान सरकार उसके ठीक उलट काम कर रही है। प्रकाश टूटी के अनुसार, सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं जैसे बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा जगत का गहराता संकट और विकास की धीमी रफ्तार—से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक विशिष्ट भाषा को जबरन थोपने और अन्य स्थानीय भाषाओं को हाशिए पर धकेलने की साजिश को विद्यार्थी परिषद किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
अभाविप की प्रमुख मांगें और आंदोलन की रूपरेखा
अभाविप ने स्पष्ट किया है कि वह विद्यार्थियों को क्षेत्र, जाति, लिंग या भाषा के आधार पर बांटने वाली किसी भी नीति का पुरजोर विरोध करती है। संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि जेटीईटी की नई नियमावली में भोजपुरी और मगही भाषा को अविलंब पुनः शामिल किया जाए। साथ ही, राज्य की भाषाई नीति में सभी स्थानीय भाषाओं को समान दर्जा और मान्यता देने की वकालत की गई है। अभाविप ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना यह ‘विभाजनकारी’ निर्णय वापस नहीं लिया, तो परिषद छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

