Jamshedpur DSE Action Against School : LFS में बिल्डिंग फंड के नाम पर छात्रों से करोड़ों की वसूली, जिला शिक्षा विभाग ने बताया आपराधिक कृत्य, स्कूल को नोटिस, 3 दिन में जवाब तलब
Jamshedpur/Jharkhand : टेल्को स्थित लिटिल फ्लॉवर स्कूल द्वारा “भवन निधि” के नाम पर छात्रों से कथित रूप से की जा रही वसूली के मामले में जिला शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) ने स्कूल प्रबंधन और प्राचार्या सिस्टर हिल्डा डी’सूजा को नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
1000 रुपये मासिक और 12 हजार नामांकन शुल्क का आरोप
शिक्षा विभाग को मिली शिकायत के अनुसार स्कूल द्वारा प्रत्येक छात्र से हर महीने 1000 रुपये “भवन निधि” के रूप में वसूले जा रहे थे। इसके अलावा नए नामांकन के समय 12,000 रुपये तक की राशि भी ली जा रही थी। विभाग ने प्राथमिक जांच में इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 13 के तहत प्रतिबंधित “कैपिटेशन फीस” की श्रेणी में माना है।
बिना अनुमति शुल्क वृद्धि पर भी आपत्ति
डीएसई ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल जिला शुल्क समिति की अनुमति के बिना 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं कर सकता। ऐसे में “भवन निधि” के नाम पर अतिरिक्त वसूली नियमों का उल्लंघन प्रतीत होती है।
तत्काल प्रभाव से वसूली पर रोक, राशि समायोजित करने का निर्देश
शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि “भवन निधि” के नाम पर चल रही वसूली तत्काल बंद की जाएपहले से वसूली गई राशि को आगामी शुल्क में समायोजित किया जाएसाथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आदेश की अनदेखी करने पर RTE Act और झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम, 2017 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेता अंकित आनंद की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की शुरुआत भाजपा नेता और शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद की लिखित शिकायत से हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।कार्रवाई के बाद अंकित आनंद ने जिला प्रशासन और डीएसई का आभार जताते हुए कहा कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों के हितों की रक्षा होगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस घटना के बाद निजी स्कूलों में फीस संरचना और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर स्कूल प्रबंधन के जवाब और विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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