February 11, 2026

मानगो : दारैन एकेडमी में साइंस लैब का उद्घाटन

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● छात्रों ने अलग-अलग भाषाओं में साइंटिफिक टॉपिक पर दिया भाषण

जमशेदपुर : मानगो स्थित आवासीय स्कूल दारैन एकेडमी में साइंस लैब का उद्घाटन एकेडमी के संस्थापक मुफ्ती अब्दुल मलिक मिस्बाही की अध्यक्षता में हुई. इस अवसर पर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. उनके साथ काफी संख्या में विज्ञान विषय के विशेषज्ञ शिक्षक, दूसरे एजुकेशनल डिपार्टमेंट के कॉलेज और स्कूल के टीचर और एडमिनिस्ट्रेटर, स्कॉलर और शहर के जाने-माने लोग शामिल हुए. समारोह का आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा साइंटिफिक मटीरियल पर दिए गए भाषण थे, जिन्होंने अपनी कलात्मक और भाषाई काबिलियत को शानदार ढंग से दिखाया.
छात्र अब्दुल्लाह बिन सुल्तान ने अरबी में साइंटिफिक मटीरियल पेश किया. मुहम्मद अनस रजा ने इंग्लिश में विज्ञान की अहमियत पर रोशनी डाली. मुहम्मद फरहान रजा ने उर्दू में साइंस की अहमियत बताई. मोहम्मद अज़ीज़ मुस्तफा और मोहम्मद अहमद रजा ने भी अरबी में साइंस की अहमियत पर ज़ोर दिया और सभी को साइंस की तरफ अट्रैक्ट किया.
फैज़ान कुरैशी ने साइंटिफिक रिसर्च को इंग्लिश में तर्कपूर्ण तरीके से पेश करने की कोशिश की. कार्यक्रम का संचालन हज़रत मुफ़्ती बद्र आलम फैज़ी निज़ामी (सद्र अल-मुदरसीन) ने उर्दू, इंग्लिश और अरबी में किया. मौके पर मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों को एकेडमी के फाउंडर ने माला पहनाई और शाल ओढ़ाकर स्वागत किया.
इस मौके पर मुख्य अतिथि कहा कि ने एक बच्चा मस्जिद का इमाम बन सकता है और वह डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर, साइंटिस्ट बनकर धर्म और सुन्नियत का काम कर सकता है. यही चीजें हम दारैन एकेडमी के बच्चों में देख रहे हैं. अगर कोई डॉक्टर या इंजीनियर ऑफिसर के साथ कोई स्कॉलर या हाफिज भी हो, तो यह यूनिक है. संस्थान की सफलता में जितना हाथ यहां पढ़नेवाले बच्चों का है, उतना ही टीचरों का भी है. उन्होंने आगे कहा कि मैं इस इंस्टीट्यूशन के फाउंडर की तारीफ करता हूं कि उन्होंने इस एकेडमी में साइंस लैब का उद्घाटन किया, ताकि बच्चे धर्म के साथ-साथ मॉडर्न एजुकेशन भी पा सकें और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे सकें. बच्चे ही देश के भविष्य के निर्माता होते हैं. इसलिए हमें बच्चों पर कड़ी मेहनत करनी चाहिए और उन्हें देश और कौम का लीडर बनाना चाहिए. इस मौके पर डीएसपी मुहम्मद अकरम ने कहा कि जैसा मैं दारैन एकेडमी में देख रहा हूं, कहीं और हम नहीं देख सकते कि बच्चे हर मामले में सफल हो रहे हैं. इससे पूर्व दारैन अकादमी के संस्थापक, मौलाना मुफ़्ती अब्दुल मलिक मिस्बाही क़िबला ने वैज्ञानिक अनुसंधान के बारे में एक विस्तृत बयान दिया. अबुल कासिम अल-ज़हरावी की सेवाओं पर प्रकाश डाला, और गांधीजी के शब्दों को उद्धृत किया कि यदि आप एक बेहतर नेता, राजनीतिक नेता और न्यायाधीश बनना चाहते हैं, तो हज़रत फारूक आज़म (रज़o) का अनुसरण करें. संस्था के अध्यक्ष, मास्टर इतालिक हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापन किया. समारोह में शामिल होने वाले विद्वानों और लोगों में मौलाना हाफ़िज़ अब्दुल वाहिद, कारी मुश्ताक आरिफ नक्शबंदी, मौलाना अबरार कैसर, कारी महबूब आलम, मौलाना गुलाम मुस्तफा फ़ैज़ी और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे.