माता पार्वती की इच्छा पर भगवान शिव ने सुनाई थी रामकथा
सोनारी गीता भवन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा का तीसरा दिन
जमशेदपुर : सोनारी कैलाशनगर स्थित गीता भवन में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को व्यास पीठ से हरियाणा से आए आचार्य रविकांत वत्स ने भगवान के निर्गुण रूप का वर्णन किया. उन्होंने बताया कि पूर्व में सती को भगवान राम पर जब शंका हुई तो भगवान शिव ने उन्हें त्याग दिया था. ऐसी ही शंका जब विवाह के बाद हिमालय पुत्री पार्वती को हुई तो उन्होंने भगवान शिव से पूछा था कि मुझे रामकथा सुनने की इच्छा है जिनका आप और सभी साधु-संत नाम जप करते हैं. मैं उनकी महिमा जानती हूं लेकिन जिनका नाम जाप आप कर रहे हैं वे पत्नी वियोग में जंगल-जंगल भटक रहे हैं, इसकी कथा सुनने की मुझे इच्छा है. तब भगवान शिव ने माता पार्वती को रामकथा का वर्णन किया था.
उन्होंने बताया कि भगवान राम का जन्म तीन कारणों से हुआ. पहला कारण भगवान के पार्षद जय-विजय की एक भूल के कारण सनकादिक ऋषि ने उन्हें श्राप दिया जो हिरणाकक्ष्य और हिरणकश्यप राक्षस और अगले जन्म में यही रावण और कुंभकरण का जन्म लिया. इनके संहार के लिए भगवान राम का जन्म हुआ. दूसरा नारद के अभिमान को जब भगवान विष्णु ने तोड़ा तो उन्होंने भगवान को ही श्राप दिया कि जैसे स्त्री के वियोग में मैं तड़पा हूं, आप भी ऐसा ही दुख पाएंगे और जिस वानर के चेहरे को देखकर मुझे हंसी का पात्र बनाया गया, उनके सहयोग के बिना आपका काज नहीं होगा और तीसरा मनु और सतरूपा ने घोर तपस्या की और भगवान विष्णु को पुत्र के रूप में मांगा. अगले जन्म में भगवान विष्णु अपने चार अंश के साथ दशरथ और कौशल्या के घर जन्म लिया. अपराह्न साढ़े तीन बजे से चली कथा शाम साढ़े छह बजे तक चली. समापन के बाद आरती हुई और उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.

