February 17, 2026

सच्चा आश्रय केवल भगवान हैं और अहंकार का अंत निश्चित है

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काशीडीह श्री रामलीला मैदान में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा का विश्राम मंगलवार को

जमशेदपुर : जब तक मनुष्य अहंकार में डूबा रहता है, तब तक वह ईश्वर से दूर रहता है. जैसे इंद्र का मान भंग हुआ और वह भगवान की शरण में आया, वैसे ही हमें भी अहंकार त्याग कर प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए. उक्त बातें वृंदावन धाम से पधारे स्वामी सर्वानंद महाराज ने काशीडीह श्री रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन अपने प्रवचन में कही. स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया कि जब इंद्र ने अपने अभिमान में आकर ब्रजवासियों पर प्रलयंकारी वर्षा की, तब भगवान ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी की रक्षा की. इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि सच्चा आश्रय केवल भगवान हैं और अहंकार का अंत निश्चित है.
स्वामी जी ने कहा कि भगवान ने ग्वाल-बालों को बैकुंठ धाम का दर्शन कराकर यह सिद्ध किया कि वे केवल ब्रज के ही नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के पालनहार हैं. कथा के अंत में रुक्मिणी मंगल विवाह का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने इसे श्रद्धा, समर्पण और निष्कपट प्रेम का दिव्य उदाहरण बताया. इस अवसर पर स्वामी सर्वानंद जी महाराज के साथ आए उनके शिष्यों जुगल किशोर, कौशल किशोर, तनुज कुमार, रमणविहारी, भूरा भाई, श्याम पंडित और प्रशांत कुमार ने वाद्य यंत्रों पर मधुर संगत कर कथा को और अधिक भावपूर्ण बना दिया. आयोजकों ने जानकारी दी कि श्रीमद्भागवत कथा का कल, मंगलवार को विधिवत विराम होगा.