June 21, 2026

SP में बड़ी टूट की चर्चा! 2027 से पहले यूपी में सियासी हलचल

akhilesh-yadav-dismissed-the-defection-buzz-as-a-bjp-attempt-to-create-an-impression-of-instability-181543645-16x9_0

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक नई सियासी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों के कुछ नेताओं के दावों ने समाजवादी पार्टी (सपा) में संभावित टूट की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि, अखिलेश यादव की अगुवाई वाली सपा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे विपक्ष का मनोबल तोड़ने की राजनीतिक रणनीति बताया है।

विवाद तब बढ़ा जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के करीब 30 सांसद कभी भी पार्टी छोड़ सकते हैं। इसके कुछ ही घंटों बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि सपा के 25-26 सांसद भाजपा में आने के इच्छुक हैं, लेकिन भाजपा उन्हें शामिल करने के पक्ष में नहीं है। मौर्य ने यह भी दावा किया कि 2027 के चुनाव के बाद सपा को बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है।

इन बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी भाजपा की सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी थी। ऐसे समय में पार्टी के भीतर टूट की खबरें राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई हैं। हाल ही में अन्य विपक्षी दलों में हुई टूट और दल-बदल की घटनाओं ने भी इन अटकलों को और बल दिया है।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी का कहना है कि यह पूरा मामला केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि उसके सांसद और कार्यकर्ता पूरी तरह एकजुट हैं और भाजपा विपक्ष की बढ़ती ताकत से चिंतित है। फिलहाल किसी भी संभावित दल-बदल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन दावों ने 2027 के चुनावी मुकाबले से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति को जरूर गर्मा दिया है।