टाटा लीज नवीकरण के मुद्दों पर विस्थापितों ने रखी अपनी बातें
उपायुक्त से मिला मूलवासी अधिकार मंच व टाटा विस्थापित संगठन का प्रतिनिधिमंडल, सौंपा ज्ञापन
जमशेदपुर : टाटा कंपनी के लीज नवीकरण से जुड़े मामलों में रैयतों, मूल निवासियों एवं विस्थापितों को अबतक न्याय नहीं मिलने के संदर्भ में झारखंड मूलवासी अधिकार मंच एवं टाटा विस्थापित संगठन का प्रतिनिधिमंडल आज उपायुक्त से उनके कार्यालय में मुलाकात की. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने टाटा लीज नवीकरण से संबंधित विभिन्न मुद्दों को उपायुक्त के समक्ष रखा. बताया कि वर्ष 2005 के लीज नवीनीकरण के समय रैयतों के अधिकारों की अनदेखी, वास्तविक विस्थापितों को झूठा विस्थापित घोषित करने, बिना लीज एवं बिना विधिवत अधिग्रहण रैयती भूमि पर कब्ज़ा तथा न्यायालय में लंबित मामलों के बावजूद भूमि को लीज अथवा सब-लीज पर दिए जाने जैसे विषय शामिल रहे.
उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि स्थायी समाधान के उद्देश्य से रैयतों एवं विस्थापितों के पास उपलब्ध सभी संबंधित कागजात, अभिलेख एवं दस्तावेज उपायुक्त कार्यालय में जमा कराएं, ताकि उनकी विधिवत जांच कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा सके. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पेसा कानून, सीएनटी/एसपीटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना भूमि से जुड़ा कोई भी निर्णय न लिया जाए तथा टाटा लीज नवीकरण से संबंधित किसी भी समिति या निर्णय प्रक्रिया में रैयतों एवं विस्थापितों को प्रतिनिधित्व दिया जाए. प्रतिनिधिमंडल में हरमोहन महतो, दीपक रंजीत, प्रह्लाद गोप, उतम प्रधान, सुनील हेंब्रम, कृष्णा लोहार, राइमूल, भारती रजक, निमाई गोप, राजन सिंह, मधुसूदन माझी, तपन पंडा, कांसी प्रधान, सूरज गौड़, गौर हेम्ब्रम, उत्पल महतो, अभिमन्यु गोप, मनिंदर सिंह, पहाड़ सिह, राजन सिंह आदि शामिल थे.

