टाटा लीज नवीकरण के पूर्व मिले मुआवजा व विस्थापन प्रमाण पत्र
मंच के बैनर तले उपायुक्त को सौंपी गई कागजात व विस्थापितों की सूची
जमशेदपुर : जिले के कई रैयत खतियानधारी व टाटा विस्थापितों का प्रतिनिधिमंडल आज झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के बैनर तले मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपा. उन्होंने झारखंड सरकार के उप सचिव मिथिलेश कुमार नीरज द्वारा भेजे गये पत्र के आलोक में उपायुक्त को आवश्यक कागजात व विस्थापितों की सूची सौंपी. प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से टाटा लीज नवीकरण के पूर्व 18 मौजा के जमशेदपुर के टाटा विस्थापित आदिवासी व मूलवासी के रैयती जमीन की सुरक्षा, जमीन वापसी, बलपूर्वक अनैतिक तरीके से अधिग्रहित जमीन की क्षतिपूर्ति व मुआवजा एवं विस्थापन प्रमाण पत्र देने की मांग की.
इस मौके पर हरमोहन ने आरोप लगाया कि वर्ष 1967 में तत्कालीन बिहार सरकार ने रैयत तथा सरकारी भूमि का सर्वे करने की अनुमति दी थी, लेकिन कानून का उल्लंघन कर कृषियुक्त भूमि, बंजर भूमि, रैयती भूमि, जलाशय का स्त्रोत एवं ग्रामसभा एवं स्वशासन व्यवस्था अंतर्गत आनेवाले गांव के लोगों द्वारा पूजा पाठ, सामाजिक कार्यों, खेलकूद आदि की सर्वे अलग से करने की बात थी. यह नहीं कर सीधे आदिवासी व मूलवासी रैयती जमीन को 1908 एवं 1937 के खतियानधारियों की जमीन को टाटा कंपनी को हस्तांतरित की गई थी, वह गैर कानूनी है. हरमोहन ने उपायुक्त से आग्रह किया कि उपरोक्त मामले में वर्ष 1996 में खतियान बनाकर टाटा कंपनी को रैयतों की जमीन को किये गये हस्तांतरण को रद्द कर खतियानधारियों का 1908 एवं 1937 के खतियान के आधार पर जांच पड़ताल कर रैयतों की पहचान कर विस्थापितों को प्रमाण पत्र देने का अनुरोध किया गया. इसकी प्रतिलिपि राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार विभाग के सचिव को भी भेजी गई है. हरमोहन के साथ सरकार को आवेदन देनेवालों में रामचंद्र महतो, वासुदेव गौड़, नगेन्द्र नाथ प्रधान, मलिंदर सिंह, उपेन्द्रनाथ पांडा, समतुल सिंह, राम सिंह, मिथिलेश गौड़, पहाड़ सिंह, राजेन भूमिज, रवि रजक, संजय रजक, अबोध सिंह, भरत गौड़, गौर हेंब्रम, कुजरी बोदरा, कमलाकांत गौड़, आशीष कुमार गौड़, सोनाराम मांझी, मीना महतो, रामचंद्र महतो आदि शामिल थे.

