Jamshedpur/Jharkhand : विश्व की अग्रणी इस्पात निर्माता कंपनियों में शुमार टाटा स्टील ने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ उत्पादन की दिशा में एक और मील का पत्थर तय किया है। कंपनी ने ‘लो-कार्बन स्टील मेकिंग’ (कम कार्बन उत्सर्जन वाली इस्पात निर्माण प्रक्रिया) तकनीकों के विकास के लिए चीन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी बीजिंग (USTB) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस वैश्विक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य इस्पात उद्योग में कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और भविष्य के लिए ‘ग्रीन स्टील’ का मार्ग प्रशस्त करना है।
इन दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ समझौता
टाटा स्टील की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस रणनीतिक साझेदारी को अमलीजामा पहनाने में टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (VP) सुबोध पांडेय और यूएसटीबी (USTB) के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर शुकियांग जियाओ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह समझौता न केवल दो बड़े संस्थानों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान करेगा, बल्कि औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए नई तकनीकों के द्वार भी खोलेगा।
संयुक्त अनुसंधान के चार प्रमुख स्तंभ
इस ऐतिहासिक एमओयू के तहत टाटा स्टील, टाटा स्टील रिसर्च एंड इनोवेशन लिमिटेड और यूएसटीबी की विशेषज्ञ टीमें मिलकर निम्नलिखित चार प्रमुख क्षेत्रों में गहन शोध करेंगी:
स्क्रैप आधारित स्टील निर्माण : पुराने लोहे (स्क्रैप) का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नया स्टील बनाना।
स्टील अपशिष्ट का पुनः उपयोग : उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले कचरे (Waste) को दोबारा इस्तेमाल में लाना।
गुणवत्ता में सुधार : अंतिम स्टील उत्पाद की गुणवत्ता और मजबूती को नई तकनीकों से बेहतर बनाना।
कार्बन कैप्चर एवं यूटिलाइजेशन : वातावरण में निकलने वाली कार्बन गैसों को सोखने और उनके पुनः उपयोग की अत्याधुनिक तकनीकों का विकास।
शैक्षणिक विशेषज्ञता और औद्योगिक शक्ति का मेल
यह सहयोग यूएसटीबी (USTB) की उच्च स्तरीय शैक्षणिक विशेषज्ञता और वहां उपलब्ध ‘पायलट स्तर’ की आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठाएगा। इससे शोध के दौरान विकसित की जाने वाली नई तकनीकों का वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों में परीक्षण करना और उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करना आसान हो जाएगा।
डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में बड़ी पहल
टाटा स्टील के लिए यह पहल नवाचार आधारित डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। कंपनी वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और यह शोध भविष्य में वैश्विक इस्पात बाजार में टाटा स्टील की प्रतिस्पर्धात्मकता और पर्यावरणीय साख को और अधिक मजबूत करेगा।