May 20, 2026

Vladimir Putin will visit New Delhi for BRICS summit:एक साल में दूसरी बार भारत दौरा: ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली आएंगे व्लादिमीर पुतिन,शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल

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सर्च न्यूज: सच के साथ: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 और 13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आएंगे। मॉस्को में क्रेमलिन के सलाहकार यूरी उशाकोव और दक्षिण अफ्रीका में रूसी दूतावास ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। भारत को इस वर्ष (2026) ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता मिली है, जिसके तहत नई दिल्ली में इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।यह यात्रा कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वे दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा समझौतों पर विस्तृत चर्चा की थी। एक छोटे अंतराल में दोबारा भारत आना दोनों देशों के बीच मजबूत और गहरे रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करता है।

इस हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी गई है। इस एजेंडे के तहत वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order), स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने जैसे कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत ने इस समिट के जरिए वैश्विक शासन सुधारों और विकासशील देशों (Global South) की आवाज को बुलंद करने की योजना बनाई है।सुरक्षा और रणनीतिक स्तर पर इस सम्मेलन को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक ‘रेलोस’ (RELOS) समझौता हुआ है। इस लॉजिस्टिक्स समझौते के बाद दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के ठिकानों, ईंधन और सैन्य साजो-सामान की मरम्मत में बड़ी मदद मिल रही है। शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन और पीएम मोदी के बीच अलग से होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में इस सहयोग को और आगे बढ़ाने तथा व्यापारिक असंतुलन को दूर करने के रास्तों पर बातचीत होगी।

इस बैठक पर वैश्विक मीडिया की भी पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के बीच ब्रिक्स समूह का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। रूस और भारत के पुराने रिश्तों के साथ-साथ इस समूह में नए सदस्यों के जुड़ने से यह मंच एक नई वैश्विक व्यवस्था की नींव रख रहा है, जिसमें भारत केंद्र बिंदु की भूमिका में नजर आ रहा है।