February 28, 2026

Jamshedpur Special Report : लौहनगरी जमशेदपुर अपराधियों और आतंकियों के निशाने पर क्यों? जानें इसके पीछे के 5 बड़े कारण | Terrorist Attack Fear

Jamshedpur Security Threat Analysis

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Jamshedpur : हाल ही में इंटरपोल और खुफिया एजेंसियों (IB) द्वारा जमशेदपुर में स्लीपर सेल की सक्रियता को लेकर जारी किए गए इनपुट ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि आखिर अपराधियों और आतंकी संगठनों के लिए यह शहर इतना ‘पसंदीदा’ क्यों बना हुआ है। टाटा स्टील जैसे विश्व स्तरीय उद्योग की यह नगरी आखिर क्यों सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा एक चुनौती बनी रहती है?

क्या हो सकती है वजह?

वैश्विक औद्योगिक पहचान और आर्थिक चोट का लक्ष्य : जमशेदपुर भारत का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। यहाँ टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और नुवोको जैसी दर्जनों बड़ी वैश्विक कंपनियां स्थित हैं। किसी भी आतंकी संगठन का प्राथमिक उद्देश्य ‘आर्थिक नुकसान’ और ‘वैश्विक ध्यान’ खींचना होता है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक हब पर किसी भी तरह का संकट न केवल देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी गूंज सुनाई देगी।

  • सामरिक भौगोलिक स्थिति (Strategic Location) : जमशेदपुर की भौगोलिक स्थिति इसे अपराधियों के लिए एक सुरक्षित ‘ट्रांजिट पॉइंट’ बनाती है।
  • कनेक्टिविटी : यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-33) से जुड़ा है और हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है।
  • पड़ोसी राज्यों की सीमाएं : यहां से पश्चिम बंगाल और ओडिशा की सीमाएं काफी नजदीक हैं। अपराधी या संदिग्ध तत्व घटना को अंजाम देकर आसानी से दूसरे राज्यों के घने जंगलों या भीड़भाड़ वाले शहरों में छिप जाते हैं। पूर्व में भी आतंकियों के ओडिशा और पश्चिम बंगाल से कनेक्शन यहीं से उजागर हुए हैं।
  • ‘स्लीपर सेल’ के लिए सुरक्षित ठिकाने और जनसांख्यिकी : खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, मानगो, आजादनगर और धतकीडीह जैसे इलाकों का इस्तेमाल पूर्व में संदिग्धों द्वारा छिपने के लिए किया गया है।
  • शहर की घनी आबादी और बाहरी लोगों का लगातार आना-जाना संदिग्धों को अपनी पहचान छिपाने में मदद करता है। वर्ष 2016 में अलकायदा (AQIS) के संदिग्ध अब्दुल समी की गिरफ्तारी ने यह साबित किया था कि आतंकी संगठन यहाँ गुपचुप तरीके से नेटवर्क विस्तार (Radicalization) की कोशिश करते रहे हैं।
  • संगठित अपराध और अंडरवर्ल्ड का पुराना नाता : आतंकी संगठनों को स्थानीय स्तर पर रसद और हथियारों की आपूर्ति के लिए अक्सर अपराधी गिरोहों की जरूरत होती है।
  • अपराध का इतिहास : जमशेदपुर में दशकों से संगठित रंगदारी और गैंगवार का इतिहास रहा है। हिमांशु प्रधान, अखिलेश सिंह जैसे नाम इस बात के गवाह हैं कि यहाँ हथियारों की उपलब्धता और अपराधी नेटवर्क काफी मजबूत रहा है। यही नेटवर्क अनजाने में या पैसों के लालच में देशविरोधी ताकतों के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बन जाता है।
  • टाटनगर जंक्शन-एक व्यस्त प्रवेश द्वार : टाटनगर रेलवे स्टेशन देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है। यहाँ से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग देश के हर कोने से आते-जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए हर एक यात्री की गहरी स्कैनिंग करना एक बड़ी चुनौती है। आतंकी इसी भीड़ का फायदा उठाकर शहर में प्रवेश करते हैं या हथियारों की तस्करी के लिए रेलवे रूट का इस्तेमाल करते हैं।
  • वर्तमान स्थिति और समाधान : जानकार व प्रबुद्ध जनों का मानना है कि जब तक जिला पुलिस का ‘लोकल इंटेलिजेंस’ (स्थानीय मुखबिर तंत्र) मजबूत नहीं होगा, तब तक बाहरी इनपुट पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। क्योंकि, जमशेदपुर की आर्थिक संपन्नता और सामरिक स्थिति ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है और दुर्भाग्यवश यही इसे दुश्मनों की नजर में सबसे बड़ा ‘टारगेट’ भी बनाती है। प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और नागरिकों की जागरूकता ही इस खतरे का एकमात्र समाधान है।

जमशेदपुर से जुड़े तार व संदिग्ध गिरफ्तारियां

  • अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) : जमशेदपुर का सबसे गहरा और खतरनाक कनेक्शन अलकायदा के दक्षिण एशियाई मॉड्यूल से पाया गया है।
  • अब्दुल समी (2016) : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित धतकीडीह से अब्दुल समी को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि वह अलकायदा के सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहा था और उसने पाकिस्तान जाकर आतंकी प्रशिक्षण भी लिया था।
  • अब्दुल रहमान कटकी : जमशेदपुर में स्लीपर सेल चलाने और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के मामले में ओडिशा से गिरफ्तार आतंकी अब्दुल रहमान कटकी के तार भी यहां के युवाओं से जुड़े पाए गए थे।
  • हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM) : 90 के दशक और उसके बाद भी इस संगठन की सक्रियता जमशेदपुर में देखी गई है।
  • अहमद मसूद अकरम : जमशेदपुर से इस संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई थी, जिसके तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़े थे। यह संगठन मुख्य रूप से कश्मीर और भारत के औद्योगिक शहरों में अस्थिरता फैलाने का काम करता था।
  • इंडियन मुजाहिदीन (IM) और सिमी (SIMI) : जमशेदपुर का उपयोग अक्सर ‘सुरक्षित पनाहगाह’ (Safe House) के रूप में किया जा चुका है।
  • स्लीपर सेल की सक्रियता : 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट और अन्य आतंकी घटनाओं के बाद जब देशभर में छापेमारी हुई, तो कई संदिग्धों के जमशेदपुर में छिपे होने या यहाँ से रसद (Logistics) जुटाने के प्रमाण मिले थे। प्रतिबंधित संगठन सिमी (SIMI) के पूर्व सदस्यों की सक्रियता भी यहाँ के मानगो और आजादनगर जैसे इलाकों में दर्ज की गई है।
  • अंतरराष्ट्रीय अपराधी सिंडिकेट (Underworld Connection) : आतंकवाद के अलावा, जमशेदपुर के कई अपराधियों के तार दुबई और मलेशिया स्थित अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट से जुड़े रहे हैं।
  • दाऊद इब्राहिम/छोटा शकील गिरोह : जमशेदपुर के कई गैंगस्टर्स पर आरोप लगे हैं कि वे विदेशों में बैठे आकाओं के इशारे पर यहाँ रंगदारी और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शहर के कुछ बड़े अपराधियों के पासपोर्ट और भागने के रूट अक्सर खाड़ी देशों से जुड़े पाए गए हैं।