1.91 करोड़ केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! जमशेदपुर के कारोबारी और बेटे को मिली राहत
रांची/जमशेदपुर: करीब आठ साल पुराने 1.91 करोड़ रुपये के कथित ठगी मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जमशेदपुर के कारोबारी विमल कुमार अग्रवाल और उनके बेटे प्रतीक अग्रवाल के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद कारोबारी पिता-पुत्र को बड़ी राहत मिली है।
शिकायतकर्ता शंकर लाल गुप्ता का आरोप था कि विमल अग्रवाल और उनके बेटे प्रतीक अग्रवाल, जो M/s Shri Narsing Construction से जुड़े हैं, ने उनसे 1.91 करोड़ रुपये की राशि लेकर उसका दुरुपयोग किया। अदालत के निर्देश पर सोनारी पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।
मामले की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, विमल अग्रवाल ने उन्हें रेलवे कॉन्ट्रैक्ट प्रोजेक्ट में निवेश का प्रस्ताव दिया था। दावा किया गया कि राउरकेला में करीब 15 करोड़ रुपये के रेलवे प्रोजेक्ट में 20 से 30 प्रतिशत तक मुनाफा होगा। इसके बाद 14 जनवरी 2017 को दोनों पक्षों के बीच एक एग्रीमेंट भी हुआ।
शिकायत में कहा गया कि जनवरी से दिसंबर 2017 के बीच शंकर लाल गुप्ता ने इस प्रोजेक्ट में बड़ी रकम निवेश की। बाद में 2.5 करोड़ रुपये के एक अन्य कॉन्ट्रैक्ट का हवाला देकर और पैसे मांगे गए। कुल मिलाकर शिकायतकर्ता ने 1.91 करोड़ रुपये निवेश करने का दावा किया।
हालांकि सुनवाई के दौरान विमल अग्रवाल और प्रतीक अग्रवाल की ओर से अदालत में कहा गया कि मामला पूरी तरह कारोबारी लेन-देन और निवेश विवाद से जुड़ा है, न कि आपराधिक धोखाधड़ी का। यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता को पहले ही करीब 1.73 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार “पप्पू”, बबीता जैन और हाईकोर्ट के अधिवक्ता निलेश कुमार ने क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन संख्या 1490/2026 दायर की थी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला मूल रूप से सिविल नेचर का है और इसे आपराधिक रंग देना उचित नहीं है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद जमशेदपुर के कारोबारी और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे कारोबारी विवादों में आपराधिक धाराओं के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद विमल अग्रवाल और उनके बेटे प्रतीक अग्रवाल को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है, जबकि यह मामला अब भी शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
