“100 साल से RSS का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं?” मोहन भागवत के बयान पर प्रियांक खड़गे का बड़ा हमला, छिड़ी नई सियासी जंग
RSS बनाम कांग्रेस: सवालों की नई लड़ाई ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान के बाद प्रियांक खड़गे ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर कोई संगठन करीब 100 साल से काम कर रहा है और अब तक उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ, तो फिर अगले 200 साल में भी होने की उम्मीद कम ही है। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
खड़गे ने उठाए कई बड़े सवाल
प्रियांक खड़गे ने RSS नेतृत्व को संबोधित करते हुए पूछा कि संगठन की कानूनी पहचान क्या है? उसकी फंडिंग कहां से आती है? आय-व्यय का सार्वजनिक हिसाब-किताब क्या है? और आखिर उसकी जवाबदेही किसके प्रति तय होती है?उन्होंने कहा कि देश में कानून सभी के लिए बराबर है और कोई भी संस्था कानून से ऊपर नहीं हो सकती। इसी वजह से RSS की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, RSS और कांग्रेस के बीच वैचारिक मतभेद कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार बहस संगठन के पंजीकरण और कानूनी ढांचे पर केंद्रित हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विमर्श बन सकता है।
सियासत में गर्म हुई बयानबाजी
एक तरफ कांग्रेस RSS से जवाब मांग रही है, तो दूसरी तरफ RSS समर्थक इसे राजनीतिक हमला बता रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में हैं और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
अब सबकी नजर जवाब पर
प्रियांक खड़गे के सवालों के बाद अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि RSS की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या संगठन इन सवालों का विस्तृत जवाब देगा या फिर यह विवाद और गहराएगा?फिलहाल इतना तय है कि RSS के रजिस्ट्रेशन और जवाबदेही को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
