May 20, 2026

“42 प्रॉपर्टी, टैक्स ज़ीरो?” — बंगाल की राजनीति में संपत्ति को लेकर छिड़ा नया तूफान

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है। इस बार विवाद का केंद्र बने हैं तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee, जिनकी कथित संपत्तियों को लेकर बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि अभिषेक बनर्जी और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर दर्जनों संपत्तियां मौजूद हैं, जिनमें से कई पर कथित तौर पर टैक्स भुगतान नहीं हुआ। इस आरोप के बाद कोलकाता नगर निगम की टीम ने कुछ संपत्तियों का निरीक्षण भी किया और कानूनी नोटिस चिपकाए जाने की खबर सामने आई है।

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों की जांच अचानक क्यों शुरू हुई। विपक्ष इसे “संपत्ति साम्राज्य” का मामला बता रहा है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है।

बताया जा रहा है कि जांच के दायरे में कुछ ऐसी संपत्तियां भी हैं, जिनके स्वामित्व, टैक्स रिकॉर्ड और उपयोग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों द्वारा लगाए गए नोटिसों ने पूरे मामले को और गर्म कर दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बंगाल की राजनीति पहले से ही चुनावी आरोप-प्रत्यारोप और सत्ता संघर्ष के कारण बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

सुवेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक मंचों से दावा किया कि उनके पास कथित संपत्तियों की पूरी सूची मौजूद है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं। वहीं टीएमसी खेमे का कहना है कि विपक्ष सिर्फ मीडिया सुर्खियां बटोरने के लिए आरोपों का सहारा ले रहा है।

इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति में एक नया नैरेटिव खड़ा कर दिया है — अब लड़ाई सिर्फ चुनावी भाषणों की नहीं, बल्कि नेताओं की संपत्तियों, टैक्स रिकॉर्ड और आर्थिक पारदर्शिता तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में जांच कितनी आगे बढ़ती है और क्या नए खुलासे होते हैं, इस पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है।

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